ग़ज़ल

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप 

वो मुझसे मुलाक़ात की तदबीर करे गा
कुछ रंग यक़ीनन वो मेरे दिल में भरे गा
The beloved will design for meeting some strategy
Would fill my heart with some colors decidedly

ये तये हुआ देखा जो उसे पहली नज़र ने
वो ऐसा हसीं है कि जो मन मेरा हरे गा
On first sight it was apparent certainty
That she would capture my heart has such beauty

मैं सोचता हूँ ग़ैर से उसकी हुई क़ुरबत
दिन आ गए अब उसके वो बेमौत मरे गा
I contemplate while to see the nearness of her with rival
I his days are numbered and indicates his death’s arrival

 

दिलचस्प अदाओं के मज़े आएंगे मुझको

वो मुझपे मोहब्बत में जो इलज़ाम धरे गा

I would be delighted to see her recreating gestures
She would charge me with blames in love matters

दीदार तेरी ज़ुल्फ़ का ठंडक है दिलों की

उल्लास बढ़ा देगा ये झरना जो झरे गा
Glancing your locks tranquil and smooth hearts all
Increase sprightliness when descend this waterfall

जब ख़त्म हुई नग़मा सराई तो गया वो
ग़ायब से मैं कहता ही रहा था कि ” अरे गा”
She set off finally, when came to an end sonority of rendering
Yet being enamored  even I kept on saying to absence, O! Sing

इज़हार ए तमन्ना में सुहैल इसका गुमाँ है

डरते मुझे देखेगा तो वो भी तो डरे गा
During uttering of love, desire it is always a probability
If she will see me scared,she will also have fear surely

तदबीर=उपाए ,क़ुरबत=समीपता ,दिलचस्प=मनोरंजक ,नग़मा सराई=गाना ,ग़ायब =अनुपस्थित ,इज़हार ए तमन्ना =प्रेम की अभिव्यक्ति ,गुमाँ=संदेह

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