के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल: ‘चंबल में आके तो देखो’ है स्लोगन। दो दिवसीय सिनेमा के कुंभ में होगा दिग्गजों का जमावड़ा।

– चंबल में सिनेमा और पर्यटन को बढ़ावा देना मकसद – तीन सितम्बर को होगा उद्घाटन समारोह इटावाः महान फिल्म निर्देशक के. आसिफ की स्मृति में आयोजित होने वाले चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के छठे वर्ष की थीम ‘सिनेमा और पर्यटन’ रखा गया है। चंबल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से इस बार भी के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल विश्व के फिल्मकारों और सिने-प्रेमियों के बीच एक सेतु बन रहा है। आगमी 3 और 4 सितंबर को एसडी फील्ड, इटावा स्थित पंचायती राज राजकीय महिला स्नातकोत्तर…

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राष्ट्र-वंदन की अनूठी काव्यंजलि “भारत काव्य पीयूष”का विमोचन सम्पन्न

चन्द्रकान्त पाराशर , एडीटर-ICN हिंदी सर्वविदित है कि हमारा देश भारत वर्तमान में अपनी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगाँठ पर अमृत महोत्सव मना रहा है । इस पुनीत अवसर पर भारतीय कवियों द्वारा रचित राष्ट्र-वंदन के अनूठे दस्तावेज के रूप में “भारत काव्य पीयूष“ कविता-संग्रह को 15अगस्त की पूर्व संध्या पर आभासी ज़ूम-माध्यम से राष्ट्र के नाम समर्पित किया गया । यू.एस.ए. से माया बंसल द्वारा माँ सरस्वती-वन्दन से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । “प्रवासी भारतवंशी अपने देश, संस्कृति व रहवासियों के प्रति सदैव आत्मिक निष्ठा के साथ जुड़ने में आत्मिक…

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नमन :15 अगस्त-आज़ादी पर्व पर

अमिताभ दीक्षित, एडिटर-ICN U.P. करें हम उनको आज नमन करें हम उनको आज नमन जिनकी आँखों में जलती थी स्वाभिमान की ज्वाला जिनके हाथ सदा जपते थे आज़ादी की माला संघर्षों की राह तनिक न जिन्हें कर सकी विचलित हो स्वतंत्र यह देश बने सिरमौर विश्व में अतुलित जिन्होंने पाला यही सपन करें हम उनको आज नमन स्मुतियों के तार छिड़ गए चला चली की बेला जीवन की घिरती संध्या में ये मन बहुत अकेला याद याद कर लिखता जाऊं बलिदानों की गाथा खड़े हुए बलिवेदी पर ऊंचा था जिनका…

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मेरा हिन्दोस्तां प्यारा

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप  ये निष्ठा का समंदर है मेरा हिन्दोस्तां प्यारा हर इक पहलु से सुंदर है मेरा हिन्दोस्तां प्यारा It is ocean of sincerity-My lovely India From every angle beauty- My lovely India छितिज़ पर कल्पना के इसकी आभा उजाले हैं ये छाया है मेरे मन पर मेरा हिन्दोस्तान प्यारा Upon the surface of my imagination its luster It prevails my heart its splendor-My lovely India यहाँ जारी दिलों से एकता के मीठे चश्मे हैं हसींतर ऐसा मंज़र है मेरा हिन्दोस्तां प्यारा Flows here the wellspring of…

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“भारत काव्य पीयूष” कवियों द्वारा राष्ट्र-वंदन का अनूठा दस्तावेज

चन्द्रकान्त पाराशर , एडीटर-ICN हिंदी Lausanne(स्विटज़रलैंड) : 10अगस्त 2022 : सर्वविदित है कि हमारा देश भारत वर्तमान में अपनी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगाँठ पर अमृत महोत्सव मना रहा है । इस पुनीत अवसर पर भारतीय कवियों द्वारा रचित राष्ट्र-वंदन के अनूठे दस्तावेज के रूप में “भारत काव्य पीयूष“ कविता-संग्रह को 15अगस्त की पूर्व संध्या पर  राष्ट्र के नाम समर्पित किया जाएगा । स्वाधीनता के अमृत-महोत्सव  में  “भारत काव्य पीयूष” पुस्तक की अवधारणा व उसे मूर्त रूप प्रदान करने में वैश्विक हिंदी संस्थान, ह्यूस्टन, अमेरिका के अध्यक्ष डा ओमप्रकाश गुप्ता व उनकी प्रबुद्ध…

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चंबल की धरती का अनोखा क्रांतिकारी : दादा शंभूनाथ आजाद

डॉ. शाह आलम राना (पुण्यतिथि पर विशेष)  किसी भी तरह के अन्याय व शोषण का प्रतिरोध चंबल के जनमानस की पहचान मानी जाती है। प्राचीन काल से लेकर उन्नीसवीं सदी तक के इतिहास में झाँके तो चंबल घाटी में बगावत एक समृद्ध परंपरा की तरह विकिसत होती रही। चंबल के लोगों ने अन्यायी अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ सतत मोर्चाबंदी की इसीलिए चंबल को शौर्य की जननी कहा जाता है। चंबल घाटी ने ऐसे तमाम मुक्ति योद्धा इस देश को दिए हैं जो अपने साहस,  त्याग और बलिदान की इबारत लिख…

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मशाल बनाम कुल्हाड़ी

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  आखिर एक समाज में पत्रकारिता की क्या भूमिका होनी चाहिए? क्या मात्र तथ्य को तथ्य रूप में प्रस्तुत से और सत्य को सत्य कहने से पत्रकारिता की भूमिका का निर्वहन हो जाता है अथवा पत्रकारिता इससे भी आगे की चीज है?   ‘समाज कैसे यात्रा करता है?’ प्रश्न रोचक था लेकिन अत्यंत गंभीर भी। जब यह प्रश्न मेरे सामने आया था तो कुछ देर तक तो मैं मात्र प्रश्न को समझने और उसकी तह में जाने की कोशिश करता रहा और कुछ पलों…

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स्वतंत्रता इतिहास के भूले हुए पन्नों में दर्ज एक अनूठी वीरांगना : गुलाब कौर

अमिताभ दीक्षित, एडिटर-ICN U.P. गुलाब कौर : इतिहास में भुला दी गयी वो महिला जिसने अंग्रेजों से लड़ने के लिए अपने पति को छोड़ दिया और एक सुरक्षित जीवन को तिलांजलि दे कर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ी. कई बार, इतिहास अपनी उन अनन्य नायिकाओं को भूल जाता है, उनके चेहरे भुला दिए जाते हैं, और उनकी बहादुरी की गाथा कोई याद नहीं करता जिनके असाधारण साहस और बलिदान को देश के इतिहास लिखते समय निश्चित रूप से को स्मरण रक्खा जाना चाहिए और उन्हें एक सम्मान जनक स्थान देना चाहिए.…

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धुएँ में स्वाहा होती जिंदगियां।

डॉ अनुरूद्ध वर्मा  तम्बाकू एवँ धूम्रपान से होने वाली बीमारियों की गंभीरता का अनुमान विश्व स्वास्थ्य संगठन के इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि दुनिया में प्रतिवर्ष लगभग 80 लाख लोग तम्बाकू जनित बीमारियों के कारण असमय मौत का शिकार हो जातें हैं तथा भारत मे यह आंकड़ा 10 लाख से ऊपर है। वर्तमान समय में तम्बाकू एवँ धूम्रपान  की लत  पूरे विश्व में जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है और पूरा चिकित्सा जगत समस्या से चिंतित है कि किस प्रकार  इससे मुक्ति पाया जाए।तम्बाकू के…

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सेल्फी : मनोरंजन या मनोरोग ?

डॉ. संजय श्रीवास्तव  क्या आप सभी जानते है की एक ख़ास सर्वेक्षण के अनुसार अवसाद के बाद दुस्साहसिक सेल्फी लेना युवाओं में होने वाली मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण निकल कर सामने आया है | यूँ तो आप सभी जानते ही हैं की तस्वीरें खिचवाने का या अपनी तस्वीरे बनवाने का प्रचलन सदियों से चला आ रहा है उसके पीछे का मनोविज्ञान यही है की हर व्यक्ति खूबसूरत दिखना चाहता है और वह अपनी खूबसूरत तस्वीर को देख कर गौरान्वित अनुभव करता है ,प्रसन्न होता है वक़्त बदलता गया…

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