उर्दू शायरी में ‘धूप’: 2

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  धूप का ख़याल आते ही ज़ह्न में रोशनी और तपन भर जाती है। धूप रोशनी भी है और ज़िंदगी भी। धूप अगर जीवन के चमकदार पक्ष की वकालत करती है तो वह जीवन के जलते हुये सफ़र की साक्षी भी है।   धूप के अनेकों रंग हैं और वैज्ञानिक तथ्य तो यह है कि जब सारे रंग एक साथ मिल जाते हैं तो ‘धूप’ बन जाती है। उर्दू शायरी में इस बहुआयामी धूप को तरह-तरह से परिभाषित करने की कोशिशें हुई हैं लेकिन…

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उर्दू शायरी में ‘धूप’: 1

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  धूप का ख़याल आते ही ज़ह्न में रोशनी और तपन भर जाती है। धूप रोशनी भी है और ज़िंदगी भी। धूप अगर जीवन के चमकदार पक्ष की वकालत करती है तो वह जीवन के जलते हुये सफ़र की साक्षी भी है। धूप के अनेकों रंग हैं और वैज्ञानिक तथ्य तो यह है कि जब सारे रंग एक साथ मिल जाते हैं तो ‘धूप’ बन जाती है।   उर्दू शायरी में इस बहुआयामी धूप को तरह-तरह से परिभाषित करने की कोशिशें हुई हैं लेकिन…

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बॉलीवुड की यहूदी परियां : एक नज़राना (श्रद्धांजलि)-प्रमिला (Esther Victoria Abraham)

एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN (The Jewish Fairies of Bollywood : A Tribute) नई दिल्ली। बॉलीवुड मे यहूदी अभिनेत्रियो के आगमन से पहले पुरुष कलाकार महिलाओ की भूमिका भी अदा किया करते थे,क्योकि संभ्रांत/सम्मानित परिवारो की महिलाये फिल्मो मे काम (अभिनय) करना दुष्कर्म (पाप) समझती थी,बल्कि सिर्फ राजा-नवाब के दरबार मे नाचने-गाने वाली नर्तकी-गायिका ही फिल्मो मे काम करने का ज़ोख़िम लेती थी।फिर बॉलीवुड से जुड़े परिवारो की महिलाये अपने परिवार के पुरुष सदस्यो की सहायता के नाम पर फिल्मो मे अभिनय करने लगी,किंतु क्रांति तब आई जब कामकाजी महिलाये अधिक…

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बॉलीवुड की यहूदी परियां : एक नज़राना (श्रद्धांजलि)-सुलोचना (Ruby Myers)

एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN (The Jewish Fairies of Bollywood : A Tribute) नई दिल्ली। पहली पत्नी सायरा से जन्मे पैगंबर इब्राहीम के मंझले पुत्र इसाक़ के बेटे याकूब (इज़रायल) के वंशजो को इज़रायली अर्थात यहूदी कहा जाता है,जब मनुष्य अनाज के एक-एक दाने के लिये संघर्ष करता था तब यहूदियो की जिंदगी मे रंग भरे होते थे,इसलिये “खुदा के चुने हुये लोग (मनुष्य)” होने के घमंड ने उन्हे मानव-जाति से अलग-थलग कर दिया।विरोधियो के निशाने पर आ जाने के बावजूद भी उनका आत्मविश्वास नही टूटा,बल्कि यहूदियो की अभिनव सोच और खोजी…

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गीत : फिर हसीं शाम मुस्कराई है …

केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN  “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – फिर हसीं शाम मुस्कराई है … गायक –अवधेश गोस्वामी (मुंबई) संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही (गीत सुनने के लिए इस Link को छुएं)  https://youtu.be/QjJRQ4p3sk0 अवधेश गोस्वामी जाने माने ग़ज़ल, सूफी, शास्त्रीय संगीत, भजन गायक हैं. प्रारम्भिक शिक्षा उन्होंने अपने पिता श्री सुदामा गोस्वामी जी से प्राप्त की. शास्त्रीय संगीत ग्वालियर घराने के श्री रागे श्री पुरंदरे जी से सीखा. उन्होंने राजा मान सिंह तोमर संगीत विश्व विद्यालय ग्वालियर से संगीत…

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ग़ज़ल

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप  इम्तिहां  लेता है वह जाने बहारां सौ-सौ सामने मेरे बहकने के हैं सामां सौ-सौ She puts me to test hundred times excessively When I have before eyes things allury so many हमने पूछा की  कहें तुमसे हम इक अपनी तलब उसका लहराते हुए कहना कि “हाँ हाँ” सौ-सौ I sought permission to tell one demand mine She replied joyously ,”yes” “yes”-“hundred”-  “hunder ” “thou pine” तीरे-ए  नादीदा ने घायल किया दिलदार का दिल साथ उसके रहे उसके थे निगह्बां  सौ-सौ The unseen arrow wounded boloved’s…

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रे नगिनिया………

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, डिप्टी ब्यूरो चीफ-ICN U.P. गोरखपुर। यह गीत लिखते समय बहुत विस्तृत लिटरेचर मन में कौंध रहा था। असाढ़ और सावन यूं कहें यह हमेशा प्रासंगिक गीत है।स्त्री मन की व्यथा ऐसी है कि वह फूलो से पत्तों से बंटती हुई हवा में घुल जाती है। सहेली होना ऐसा भाव है जहाँ’ नगिनिया ‘ उपमा दु:ख और विरह को कुरेदते अपने को ,अपनी सखी को देना सामान्य सी बात है।मैंने इस गीत को जीने के लिये इस परिदृश्य को उतरकर महसूसा है भाव तक उतरिये मज़ा आयेगा।कजरी खेलने…

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गीत : ग़म की ये रात खुशियों की सुबह लाएगी …

केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत– ग़म की ये रात खुशियों की सुबह लाएगी … गायिका–जैस्मीन मेहता (अहमदाबाद) संगीतकार -केवल कुमार गीतकार -अशोक हमराही https://youtu.be/K4NfW0hZHl8 सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका जैस्मीन मेहता ने भारत के लगभग सभी बड़े शहरों और दुनिया भर के कई देशों में अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने कई हिंदी और हॉलीवुड फ़िल्मों के लिए पार्श्व गायन किया है। गुजराती लोकनृत्य (गरबा), बॉलीवुड रीमिक्स, ड्रामा, जिंगल्स, आदि में उनकी प्रतिभा सदैव सराहनीय रही है। जैस्मीन मेहता ने हाल…

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कौन जाने रचा किसने ये ऊहापोह का खेल

अमिताभ दीक्षित, एडिटर-ICN U.P.  कौन जाने रचा किसने ये ऊहापोह का खेल किसने बिछायी मन की बिसात पर शतरंज की बाज़ी कौन लाया इकट्ठे करके ये पुतले किसको छला गया और किसने छला लीलाधारी छद्मवेशी शपथ और तमस पथ गामी वर्जनाओं को किसने रख दिया आमने-सामने सम्बन्धों के सन्दर्भों की गणित में किसने कितना जोड़ा किसे घटाया कितने गुणे कितने भाग जीवन ने किसको कितना अवसर दिया मौका दिया और कौन किसे चुनने के लिए बाध्य किया गया परिभाषाओं की सीमायें तोड़ कौन निकला रचना की तलाश में किसके हिस्से…

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राजस्थान : सचिन पायलट न घर के न घाट के।

प्रो. प्रदीप कुमार माथुर नई दिल्ली। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फिलहाल अपनी कुर्सी बचाने में सफल हो गए हैं। इस तरह लगता है कि कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के संघर्ष का पहला राउंड जीत लिया है। आगे आने वाले दिनों में क्या होगा इस समय कहना कठिन है। पर जिस तरह से सचिन पायलट को बैकफुट पर आना पड़ा और जिस तरह अपनी रणनीति में असफल होने के बाद बीजेपी के नेताओं को अपना मुंह छिपाना पड़ रहा है, उससे लगता है कि राजस्थान का राजनीतिक संकट फिलहाल टल गया…

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