तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप कल आने वाली संतति मुझसे पूछेगी, सुनते हैं जीवन राग किसी ने गाया था। इस धरती पर भी स्वर्ग देश की दुनिया से, इक गीत-पुरुष कुछ दिन रहने को आया था॥ (1) यह भी सुनते हैं जब वह गीत सुनाता था, यह वक्त ठहर सा जाता था सम्मोहित हो। धरती मोहित, आकाश अचम्भित होता था, था खूब चमकता अंधकार आलोकित हो॥ (2) जलती लू में भी सावन खूब बरसता था, हिमपात हरारत से अक्सर भर जाता था। मधु छटा चांद की बारिश बीच बिखरती थी,…
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महान गीतकार पद्मभूषण कवि गोपालदास नीरज का एम्स में निधन
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पांव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई, पातपात झर गए कि शाख शाख जल गई, चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई, नई दिल्ली। महान गीतकार पद्मभूषण कवि गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे।आगरा में प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें बुधवार को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। नीरज के लिखा हर गाना हिट…
Read Moreलेखक एवं कला समीक्षक चंद्रकांत पाराशर को साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में डॉ. परमार सम्मान से नवाजा
झाकड़ी, 30-जून, 2018: ब्रह्मर्षि आचार्य चंद्रमणि वशिष्ठ की जयंती के अवसर पर हि.प्र. सिरमौर कला संगम वशिष्ठ आश्रम बायरी –ददाहू द्वारा दिनांक 28 जून, 2018 को 60वें राष्ट्र स्तरीय अलंकरण समारोह का आयोजन ददाहु के समीप बायरी में किया गया । इस समारोह में हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि ब्रह्मर्षि आचार्य चंद्रमणि वशिष्ठ ने अपनी निस्वार्थ सेवा भावना और आत्मिक समर्पण से बायरी को तपोस्थली बना दिया है । उन्होने कहा कि अलंकरण समारोह एहसास दिलाता है कि बायरी में…
Read Moreदेखो पिता होगा शायद…
आलोक सिंह, न्यूज़ एडिटर, आई.सी.एन. ग्रुप वो आज फिर मुस्कुराता हुआ दाखिल हुआ फिर आज वो बाहर फिर थोड़ा ज़लील हुआ देखो पिता होगा शायद…. वो आज हमारे लिए मिठाईयां लिए दाखिल हुआ दोपहर के खाने में फिर उसने आज पानी ही पिया देखो पिता होगा शायद… नींद न टूटे मेरी इस लिए खांसने के लिए बाहर गया रात को आज फिर उसने बिना दवा के गुज़ार दिया देखो पिता होगा शायद… जन्मदिन पर तेरे, वो फिर खिलोने ले आया कड़ी धूप में फिर कुछ मील पैदल चल कर आया देखो…
Read Moreसुबह सुबह की बारिश
आलोक सिंह, न्यूज़ एडिटर, आई.सी.एन. ग्रुप सुबह सुबह की बारिश उस पर ये मौसम की साजिश बूंद बूंद भीगती मिट्टी की सौंधी सी खुशबू रफ्ता रफ्ता कम होती ये सीने की तपिश सुबह सुबह… सरकती ज़मीन और खामोश सरकते पहाड़ यूँ लम्हा लम्हा पड़ता रहा ज़मीं को फालीज़ सुबह सुबह… टूटते दरख्त और टूटती सब उम्मीदें अब ना गुले खुशबू और न कशिश सुबह सुबह… अबके बहार में मिल जाए क़ुर्बत-ऐ-मंज़िल ख़ामोशी से धुल जाए कुदरत की ख़लिश सुबह सुबह की…
Read Moreप्रार्थना -2
तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप प्रार्थना शब्द के साथ जो मानसिक चित्र उभरता है, वह बड़ा ही पवित्र, निश्छल व शांत है- कहीं दूर वादियों में चाँदी की घंटियों की जल तरंग- पहाड़ों की चोटियों पर तैरता सुवासित धूम्र और प्रकृति की अधमुँदी आँखों में तैरता संतोष की पराकाष्ठा तक पहुँचा एक जादू । कितना पवित्र – कितना अलौकिक – कितना दिव्य । प्रार्थना व्यक्ति और परमात्मा के बीच संपर्क सेतु है। शायद इसी विचार स्तर पर मुझसे यह शे’र जन्मा है “जिस्म मेरा सफर पे है बाहर, मेरे अंदर…
Read Moreप्रार्थना -1
तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप प्रार्थना शब्द के साथ जो मानसिक चित्र उभरता है, वह बड़ा ही पवित्र, निश्छल व शांत है- कहीं दूर वादियों में चाँदी की घंटियों की जल तरंग- पहाड़ों की चोटियों पर तैरता सुवासित धूम्र और प्रकृति की अधमुँदी आँखों में तैरता संतोष की पराकाष्ठा तक पहुँचा एक जादू । कितना पवित्र – कितना अलौकिक – कितना दिव्य । प्रार्थना व्यक्ति और परमात्मा के बीच संपर्क सेतु है। इस सेतु का प्रयोग कर अपने नश्वर शरीर व स्थूल काया के साथ ही परम सत्ता की ऊर्जा…
Read Moreन वो काबे से निकला न मंदिर से वो
आलोक सिंह, न्यूज़ एडिटर, आई.सी.एन. ग्रुप “ न वो काबे से निकला न मंदिर से वो ये कौन से ठेकेदार तबाही पर उतरे जो तेरी तालिमों में तो सारे रास्ते मोहब्बत को फिर ये निकले किस रास्ते से बतला तो दो, ज़ुबाँ कोई भी सही सबक एक ही मिला सबको फिर ये कौन सी जगह इतना ज़हर मिला तुमको ज़हर इतना तो साँपों में भी नही देखा हमने तो कितने साँपों को डसकर ये जहर मिला तुमको तुम ये कौनसी जगह ले आये हो क़ायनात को ये ज़िम्मा…
Read Moreस्वीडिश अकैडमी 2018 का साहित्य के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार रद्द करने का फैसला ले सकती है
स्टॉकहोम। इस साल अपने एक सदस्य के पति पर रेप और यौन शोषण के आरोप के मामले को बढ़ता देख स्वीडिश अकैडमी 2018 नोबल लिटरेचर प्राइज रद्द करने का फैसला ले सकती है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस बारे में औपचारिक घोषणा हो सकती है।स्वीडिश रेडियो की रिपोर्ट के मुताबिक अकैडमी के अंतरिम स्थायी सचिव ऐंडर्स ऑलसन ने कहा, हम इसके बारे में विचार कर रहे हैं। जल्द ही आपको जानकारी देंगे। बताया जा रहा है कि अकैडमी के कई सदस्यों ने सुझाव दिया है कि इस…
Read Moreखामोशी से तुम सब कह जाती हो
आलोक सिंह, न्यूज़ एडिटर, आई.सी.एन. ग्रुप खामोशी से तुम सब कह जाती हो जब खामोश नज़रों से मुझे देखती हो अब वो ख़ामोश नज़रे मैं पढ़ लेता हूँ कितने ही सवालों के ग़ुबार देखता हूँ गुमसुम शाम और रात सी ठहर जाती हो जब भी आंखों से अश्क़ बहा जाती हो मंज़िलें खामोश तेरे आने की राह देखती है और सूने रास्तों पर तेरे क़दमों निशान ढूँढती हैं कितने अफसानों को तुम पीछे छोड़ जाती हो जब भी ख़ामोश निगाहों से मुड़के देखती हो महफिलें भी देखो कितनी वीरान सी…
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