एसजेवीएन के नए निदेशक (विद्युत) के रूप में सुशील कुमार शर्मा ने कार्यभार ग्रहण किया

चन्द्रकान्त पाराशर (वरिष्ठ एसोसिएट एडिटर) ICN GROUP सुशील कुमार शर्मा ने मिनी रत्न, शेड्यूल ‘ए’- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एसजेवीएन में निदेशक (विद्युत) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया I इससे पूर्व  सुशील कुमार शर्मा एसजेवीएन में 1500 मेगावाट के नाथपा झाकड़ी जल विद्युत स्टेशन में महाप्रबंधक (मेकेनिकल) के पद पर आसीन थे I  शर्मा ने  आर.के बंसल के दिनांक 31 जुलाई, 2020 को सेवानिवृत्त होने के पश्चात इस पद पर कार्यभार ग्रहण किया I  शर्मा ने वीएनआईटी, नागपुर से बीई (मैकेनिकल) किया हैं I  शर्मा को एसजेवीएन सहित अन्य…

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बॉलीवुड की यहूदी परियां : एक नज़राना (श्रद्धांजलि)-रमोला (Rachel Cohen)

एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN (The Jewish Fairies of Bollywood : A Tribute) नई दिल्ली। पहली पत्नी सायरा से जन्मे पैगंबर इब्राहीम के मंझले पुत्र इसाक़ के बेटे याकूब (इज़रायल) के वंशजो को इज़रायली अर्थात यहूदी कहा जाता है,जब मनुष्य अनाज के एक-एक दाने के लिये संघर्ष करता था तब यहूदियो की जिंदगी मे रंग भरे होते थे,इसलिये “खुदा के चुने हुये लोग (मनुष्य)” होने के घमंड ने उन्हे मानव-जाति से अलग-थलग कर दिया।विरोधियो के निशाने पर आ जाने के बावजूद भी उनका आत्मविश्वास नही टूटा,बल्कि यहूदियो की अभिनव सोच और खोजी…

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शब्द उमड़ रहे हैं, घुमड़ रहे हैं

अमिताभ दीक्षित, एडिटर-ICN U.P. शब्द उमड़ रहे हैं, घुमड़ रहे हैं मेरे और तुम्हारे भीतर वाक्य बनने को लालायित, आतुर ध्वनियों की सीमा नहीं चाहिए उन्हें भी आकार प्रखर बनने से पूर्व ज्वाला का एक आहार जीवन से प्रेरित आहट टूटी सी सहमी सहमी सन्देह करेगी सदियों पर अनचाहा गर्भस्थ शिशु जैसे अचानक चिहुँक उठेगा हौले से बोलेगा ‘ माँ ’ एकान्त में एक दिवस विश्व के कोलाहल से दूर अंचल के पास माँ उसे चुमकारे जैसे एक ही अतीत नहीं कई से इतिहास व्याकुल हैं शब्दों की उमड़न से घुमड़न से चेतनता अस्तित्व के…

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पाकिस्तान के सामने वैचारिक अस्तित्व का संकट

प्रो. प्रदीप कुमार माथुर नई दिल्ली। आज पाकिस्तान गंभीर संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान चाहे कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें करें और चाहे चीन से मिलकर भारत के विरुद्ध विश्व में अपना वर्चस्व दिखाने का दावा करें लेकिन वह मन ही मन समझते हैं कि वह उस जर्जर और कमजोर देश के नेता हैं जिसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लग रहा है। पाकिस्तान में आर्थिक और राजनीतिक संकट तो है ही पर यह वैचारिक संकट वर्ष 1970-71 के संकट से भी बड़ा है जब पाकिस्तान विभाजित हुआ और…

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उर्दू शायरी में ‘आँसू’ : 1

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  हर ‘आँसू’ यानी ‘अश्क’ की अपनी ही कहानी है। चाहे खुशी हो या ग़म, आँसू अपनी दोस्ती हमेशा ही शिद्दत से निभाते हैं। सत्यता यह है कि आँसू के खारे पानी में वह आग है जो दिल पर जमी बर्फ़ को गला देती है और उसके बाद आदमी अपने-आप को हमेशा ही हल्का और तरोताज़ा महसूस करता है। कभी-कभी तो आँसू भी घड़ियाली होते हैं जो दिल से नहीं, सिर्फ़ आँखों से बरसते हैं। आँसुओं की अपनी जु़बान है। ज़िंदगी के जितने फ़लसफ़े…

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अमेरिका की जेलों में गुजारे 13 वर्षों ने मेरी ईमानदारी और सहनशक्ति का टेस्ट लिया: लाल भाटिया

सच्ची घटनाओं पर आधारित लेखक लाल भाटिया की किताब प्रकाशित सोचिए, अगर आपको किसी दूसरे देश में बिना किसी सपोर्ट सिस्टम के अपनी आजादी की लड़ाई लड़नी पड़े, अपने ही परिवार के सदस्यों से धोखा खाना पड़े और मुकदमे का सामना करना पड़े?तो यह कितना कठिन लगता है। खैर, यह लेखक लाल भाटिया की पुस्तक इंडिक्टिंग गोलियत ’की वन लाईनर है जो एक ऐसे व्यक्ति की वास्तविक जीवन की कहानी है जिसे अमेरिका में एक वकील के बिना न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा था जब उसकी पूर्व पत्नी के…

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विवेकानंद द लीजेंड ऑफ इण्डिया।

मोहम्मद सलीम खान, एसोसिएट एडिटर-आईसीएन  सहसवान/बदायूं। इस संसार में समय-समय पर अनेक महान आत्माओं ने जन्म लिया है जिन्होंने मानवता की सेवा की खातिर अपना संपूर्ण जीवन विश्व समुदाय की भलाई में न्योछावर कर दिया।इस संसार में यदि कोई सबसे उत्तम एवं उत्कृष्ट (The  greatest and exquisite job) कार्य है तो वह कार्य समाज सेवा है भूखे को खाना खिलाना नंगे को कपड़ा पहनाना भटके को रास्ता दिखाना संसार के सबसे  उत्कृष्ट कार्य हैं। ईश्वर ने समय-समय पर इस संसार में ऐसी महान आत्माओं को भेजा जिन्होंने  संसार की  मोह…

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उर्दू शायरी में ‘धूप’: 3

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  धूप रंगीन भी है, चमकदार भी, उजली भी और ज़िन्दगी की पर्याय भी है। वहीं यह वक़्त की सख़्ती, कड़ी मेहनत और मुसीबतों की लड़ी की भी मिसाल है। इसके बहुत से अर्थ हैं जो विभिन्न परिस्थितियों में बिल्कुल अलग-अलग चित्र बनाते हैं। जिसके जैसे अनुभव हैं, उसने धूप का वही रुख़ हमारे सामने अपने अशआरों के माध्यम से किया। धूप के बिना भी नहीं रहा जा सकता और मुसलसल धूप के साथ भी नहीं रहा जा सकता। सच कहा जाये तो हम…

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जॉर्ज-एक हीरो। जो जीरो हो गए।

प्रो. प्रदीप कुमार माथुर नई दिल्ली। वर्ष 1980 के दशक से प्रारंभ हुए आर्थिक उदारवाद के युग में जन्मी और बढ़ी हुई पीढ़ियों के लिए शायद यह समझना बहुत मुश्किल होगा। 1950-60 के दशकों में युवावस्था की दहलीज पर पैर रखने वालों के लिए विरोध का कितना महत्व था। यथा स्थिति और व्यवस्था तथा स्थापित समस्याओं का विरोध करने वाले स्वर बहुत ही सम्मानजनक तथा रोमांचकारी माने जाते थे जिन्हे सामाजिक संचेतना रखने वाला हर युवा अपना आदर्श बनाना चाहता था। वर्ष 1947 में ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मिली स्वतंत्रता के…

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 28 जुलाई पर विशेष-जरूरी है जागरूकता और बचाव

डॉ अनुरूद्व वर्मा, एडीटर-ICN विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व हेपेटाइटिस दिवस का आयोजन प्रति वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन  जन सामान्य में इस बीमारी की रोकथाम, परीक्षण और उपचार के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है । हेपेटाइटिस की गंभीरता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दुनिया में लगभग 40 करोड़ लोग इससे ग्रसित हैं और  प्रति वर्ष दुनिया में लगभग 14 लाख लोगों की मृत्यु रोग  कारण हो जाती है।  देश में लगभग 1 करोड़ 50…

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