“ बेटियाँ, उजाला-हैं “

By: C.P. Singh, Literary Editor-ICN Group बेटियाँ ,  उजाला – हैं –  जी , घर – सँसार  – की | प्रभु – का “ दिया “ हैं – ये – ही , जग – आधार – भी || सुख – होती – हैं – ये – तो , खुशियों – की – डाली | कैसे – पलती – हैं – देखो  ? प्रभु – जी – की – पाली ? शुभता – भरें – ये , चेतो , अन्न – धन – की – थाली | “ दैवी – पुष्प…

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स्वर्ग की खिड़की

तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  मैंने सुना है – समय कभी रुकता नहीं है। समय यात्रा करता है – निरंतर और अटूट। शायद आपने भी यह सुना होगा। सब कुछ नश्वर है – मात्र समय चिरंतन है । समय एक ऐसी सड़क है जो मोटी-पतली, ऊँची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी तो हो जाती है लेकिन कभी पीछे नहीं लौटती। समय के वाहन में कोई रिवर्स गियर नहीं होता। यह सब कुछ प्राय: सत्य लगता है । मुझे भी यह सब एक शाश्वत नियम की तरह ही महसूस होता था – एक ऐसा सिद्धांत…

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गीत: बहुत समय है

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप प्रिय मित्रों, हम सब विभिन्न धर्म, मज़हब, पूजन शैली व मतों के अनुनायी हैं और यही हमारी विशेषता है। विश्व में ‘भारत की अनेकता में एकता’ से श्रेष्ठ मिसाल कहीं उपलब्ध नहीं है। किंतु जब भारत पर कोई खतरा मंडराता है तो हमारे वैयक्तिक धर्म ‘राष्ट्र धर्म’ में परिणित हो जाते हैं। आज तो सिर्फ़ भारत ही नहीं, पूरा विश्व और संपूर्ण मानवता ही दाँव पर लगी है और इसलिये हम सबकी ज़िम्मेदारियाँ और भी बढ़ जाती हैं और आज हम हिंदू, मुसलमान,…

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चोट के कारण को पहचाने नयी चोट को पुरानी न होने दे

डॉ. नौशीन अली, ब्यूरो चीफ-ICN मध्य प्रदेश ‘‘गिरना संभलना फिर उठकर खड़े हो जाना कभी हिम्मत न हारना’’ भोपाल।आज कल की इस भाग–दौड़ भरी लाइफ में इंसान इतना व्यस्त हो गया है, कि उसे अपनी सेहत की परवाह किये बिना ही बस दौड़े जा रहा है। इस भाग–दौड़ में उसको चोट भी लग जाती है या खेलते वक़्त जिसे हम  स्पोर्ट्स  इंजरी  कहते है पर वो उसको नजरअंदाज़ कर देता है  हमें ऐसी चोटों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कई बार ऐसी चोटे बड़ा रूप ले लेती है चोट या  इंजरी सिर्फ जवान को नहीं बच्चे  बूड़ो को भी लग जाती है सबके अपने अलग कारण होते है चोट का लगना मौसम पर भी निर्भर करता है क्योंकि जब चोट लगती है तो खून निकलता है चुकी गर्मी के मौसम में आर्टेरिअल वासोडाईलेटेशन (धमनी (फैलना)– गर्मी के कारण होता है तो ब्लड पी.एच.में भी बदलाव देखा जाता है खून में बदलाव की वजह से जब गर्मी के मौसम में चोट लगती है तो खून ज़्यादा निकलता है। इसी के उल्टा ठण्ड का मौसम है  उसमें  वासोकॉन्सट्रिक्शन (धमनी सिकुड़ना) होता है तो खून कम निकलता है हमको जो चोट लगी है उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए कई बार लोग चोट को मसाज करवा कर उसको खुद ही गंभीर  बना लेते है जबकि कभी भी चोट को मलवाना नहीं चाहिए अगर कभी जब चोट लग जाये उसमे सूजन आने लगे पर दर्द न हो तो डरने की कोई ज़रुरत नहीं है। एक्यूट इंजरी— इसके जो लक्षण आते है अचानक से दर्द करराहट जो ज़्यादातर खेलते वक़्त या गिर जाने से आदि अचानक गतिविधियों से होता है  जो दर्द मासपेशियो और टेंडन में होता है। चोट लगे हिस्से में अचानक से सूजन आ जाना नीला पड़ने लगना क्योंकि ब्लड सर्कुलेशन कम होने के कारण स्प्रेन जिसे हिंदी में मोच कहते है इस में दर्द सूजन कोई मूवमेंट करने में तकलीफ होना। एक्यूट इंजरी अपनी चोट की देखभाल करे इसका एक फार्मूला है (PRICE) P-अपनी चोट को प्रोटेक्ट करके रखे R-आराम करे 2 से तीन दिन I-बर्फ लगाए बर्फ लगाने से सूजन दूर होगी (कभी भी बर्फ को सीधे उपयोग में न ले किसी कपड़े में रखकर ले C- किसी सपोर्ट की सहायता से कंप्रेस करके रखे (बैंडेज बांधने से चोट लगा एरिया का कम उपयोग होगा पर बैंडेज रात को सोते वक़्त उतर दे) E- किसी सोफे या तकिये की मदद से चोट को थोड़ा ऊपर उठा कर रखे (चोट वाले हिस्से को थोड़ी देर ऊँचा करके रखे ताकि खून का बहाव सही से बहे) एक फार्मूला है (HARM) वो बिलकुल न करे H-गर्म से सिकाई से ब्लड फ्लो बढ़ता है और सूजन बड़ जाती है तो ऐसा न करे A-अल्कोहल पिने से खून ज़्यादा बहने लगता हैद्ध R-ज़्यादा चलना फिरना बंद करे आराम करेद्ध M- मसाज न कराये इससे और चोट बढ़ सकती है सूजन आदि क्रोनिक इंजरी  चोट)  में धीरे–धीरे लक्षण आते है शुरू धीमा दर्द होगा जिसे मरीज ज़्यादातर नजरअंदाज़ कर देते है उन्हें ये नहीं करना चाहिए वो दर्द पुराना हो जाता है इस चोट में हमें थोड़ा ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये पुरानी हो चुकी होती है, तो ब्लड सर्कुलेशन भी धीमा हो जाता है, तो ऐसे में पहले गर्म सिकाई फिर मिनट बाद ठंडी सिकाई करे, जिससे सामान्य तोर पर सर्कुलेशन ठीक हो सके। क्रोनिक चोट में ये फार्मूला फॉलो करे (MEAT) मिट.   M – मूवमेंट कम ई.  थोड़ा एक्ससरसाइज ए. अनलजेसिक टी. ट्रीटमेंट चोट एक बड़ा टॉपिक है, फिर भी कुछ शब्दों में मैंने ऐसे समझाने की कोशिश की है।उम्मीद है आप सबको पसंद आएगा, आप सब स्वस्थ रहे, और किसी भी चोट को कभी…

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हाँ…. मै लड़की हूँ !!!!!

अर्चना किशोर (छपरा सारण) बिहार हाँ, मै लड़की हूँ !!! पढ़ने में शायद थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि इसमें बताने वाली क्या बात है लेकिन ये ख़्याल आज दिल में बार-बार आ रहा है । हाँ, मै लड़की हूँ !!! क्या हुआ जो “मै कौन हूँ” और “आज मै क्या हूँ” ये सवाल खुद से नहीं कर रही या सवाल कर भी रही तो जवाब में ख़ामोशी है । हाँ, मै लड़की हूँ, मुझे क्या हुआ जो हमें बचपन में ही शर्माना, बोलने, चलने और बैठने का तरीका सिखाया…

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हाँ…. मै लड़की हूँ !!!!!

अर्चना किशोर (छपरा सारण) बिहार हाँ, मै लड़की हूँ !!! पढ़ने में शायद थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि इसमें बताने वाली क्या बात है लेकिन ये ख़्याल आज दिल में बार-बार आ रहा है । हाँ, मै लड़की हूँ !!! क्या हुआ जो “मै कौन हूँ” और “आज मै क्या हूँ” ये सवाल खुद से नहीं कर रही या सवाल कर भी रही तो जवाब में ख़ामोशी है । हाँ, मै लड़की हूँ, मुझे क्या हुआ जो हमें बचपन में ही शर्माना, बोलने, चलने और बैठने का तरीका सिखाया…

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मोसूल

अमिताभ दीक्षित, सीनियर एसोसिएट एडिटर, ICN ग्रुप यह महानगर एक दीवार है खंडहरों की जिसके उस पार डूब जाता है सूरज हर रोज़ गहरे काले स्याह अँधेरे चट्टानों की मानिंद खड़े हो जाते हैं आँखों में हर रोज़ बस्तियां न खुद से बात करती हैं न खामोशी से धुआं भरे कसैले जुबां के जायके इंतज़ार करते हैं निवालों का कोई कुछ नहीं कहता मगर डरता है सन्नाटों से ……और धमाकों से अब भी उसूलों के लिए लड़ी जा रही जंग में कोई उसूल बचा नहीं रह गया चीखें ………………..नहीं सिसकियाँ…

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इरादे तो न थे मिलने के हमारे पर क्यूँ मिल जाते थे वो बहाने से

सत्येन्द्र कुमार सिंह, संपादक-ICN   1 इरादे तो न थे मिलने के हमारे पर क्यूँ मिल जाते थे वो बहाने से, था मज़बूत दिल से भी बहुत मैं, क्यूँ होश उड़ गए नज़रों के निशाने से, चाहत भी थी, मुहब्बत भी थी दिल मुस्कुराने लगा खुद के तराने से, फिर न जाने क्या हुआ कि वो सरकने लगे कुछ बेगाने से दिल को आहत किया करते रहे वो बन कर जाने–जाने किन्तु अनजाने से कष्ट हुआ पर आँसू गिरा न सका कि अफ़सोस न हो उन्हें इस दीवाने से है दुआ कि हँसे और मुस्कुराए वे, पर न रोकें हमें वो छद्म मुस्कुराने से। 2 पीपल के सरसराते पत्ते सुनाते मधुमय संगीत मीनारों पर बैठे पंक्षी गाते समूह गीत। दूर शिवालय से आती ध्वनि वापस बुलाती मेरे स्वयं को। 3 जिन दीवारों को लांघ न सके बचपन में, आज उससे भी ऊँचे बंदिशें बना करते है रक्षा धनादि की, और बाँट लेते हैं इंसानी रिश्तों को…..

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स्वर्ग में बीवी

अखिल आनंद, एसोसिएट एडीटर-ICN ग्रुप बचपन से त्याग तपस्या और सादगी वाला जीवन व्यतीत करता रहा हूँ, जीवन में सदा अच्छे काम करना तथा लोगों में भलाई करना यही कर्म रहा हैं, उद्देश्य यही है कि स्वर्ग की प्राप्ति हो। स्वर्ग के प्रति एक उत्सुक्ता हमेशा से ही रही है। हो भी फिर क्यों न स्वर्ग तो स्वर्ग ही है। कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार स्वर्ग की प्राप्ति हो ही गई। बड़ी खुशी हुई कि हमारा उद्देश्य सफल रहा। प्रभु ने हमारी सुन ही ली, और मृत्यु उपरान्त सीधे स्वर्ग का दरवाजा खुला। अन्दर…

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समाचारपत्र से प्रेमपत्र तक

तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  हर सवेरे आ जाते हैं समाचारपत्र , खिड़की के रास्ते उछल कर प्रवेश करते हैं ड्राइंगरूम में हत्या , लूट, आगजनी और बलात्कार । कवि कविता रच रहा है लेखक लिख रहा है सत्य और विश्वास की कहानी संगीतकार बरसाता है अक्षत निर्झर और चित्रकार रचता है, इस लिज़लिज़ी ज़मीन पर दमदमाता अंबर लेकिन – यह सब समय के साँचे पर कस नहीं पाता पता नहीं – यह समय गलत है या ये लोग। सोचता हूँ , अभी नहीं आया था मेरे जन्म लेने का…

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