भारतीय संगीत के आदि प्रेरक

डॉ शिखा भदौरिया, असिस्टेंट एडिटर, ICN एंटरटेनमेंट नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदयेन च । मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ॥  भावार्थ :- अमुक श्लोक में भगवान विष्णु जी कह रहे है, ” हे नारद ! ना तो मैं वैकुण्ठ में निवास करता हूँ , ना ही योगीजनों के हृदय में ही मेरा निवास है। मै तो वहाँ निवास करता हूँ जहां मेरे भक्तगण गायन-वादन करते है। ”  इस एक श्लोक से ही संगीत की प्रासंगिकता प्रदर्शित होती है की स्वयं ईश्वर भी संगीत को कितनी महत्ता देते है। जैसा…

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आई सी एन ऑक्टेव-2020 : संगीत गंगा में वैश्विक आचमन

संगीत मात्र मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि एक प्रमाणित व स्थापित चिकित्सीय थेरेपी भी है जो मस्तिष्क में दिव्य ऊर्जा रोप कर मानवीय शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाती है और व्यक्ति को किसी भी रोग, व्याधि अथवा संक्रमण का प्रतिकार कर स्वस्थ रहने अथवा होने की प्राकृतिक शक्ति प्रदान करती है। एक पुरानी कहावत है – ‘जब रोम जल रहा था तब नीरो वंशी बजा रहा था।’ शायद इस कहावत को रचने वाले की दृष्टि में नीरो का वंशीवादन अकर्मण्यता एवं दायित्व  वर्जन हो और हो सकता है कि…

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उर्दू शायरी में ‘ईद’

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  दरअसल “ईद” सिर्फ़ एक त्यौहार या पर्व ही नहीं है बल्कि ईद “दीपावली”, ” होली” एवं “क्रिसमस” की तरह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति भी है। ईद ज़िंदगी को सर्वश्रेष्ठ ढंग से जीने का सलीका है।भारतवर्ष में ‘ईद’ केवल मुसलमान भाई-बहनों का ही नहीं बल्कि सारे मुल्क का त्यौहार है। ‘ईद’ इस्लाम धर्म का मूल बिंदु है और यह अपने आप में इतने संदेश व पवित्र विचारधारायें समेटे हैं कि दुनिया का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म, मज़हब अथवा पंथ से संबंधित हो,…

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भाषा बनाम संस्कृति और संस्कार

डॉ. संजय श्रीवास्तव  मैं आप सभी से सिर्फ एक ही बात पूछना चाहता हूँ कि क्या भाषा किसी संस्कृति के निर्माण करने में सहायक होती है ? मेरा मानना है कि वैसे तो एक संस्कृति के निर्माण में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है किन्तु किसी भी संस्कृति को दर्शाने में सबसे ज्यादा महत्त्व विचारों और भाषा का होता है | हमारे संस्कार हमारे विचारों का एक आइना होते हैं जो ये दर्शाते हैं कि जो भी विचार हमारे मन मस्तिष्क में चल रहे होते हैं वो हमारे क्रिया कलापों…

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भोजपुरी: भाषाई अस्मिता का संघर्ष और राजनीति

उदय नारायण सिंह, ICN बिहार सरकारी आँकड़ों में आठ करोड़ परन्तु धरातल पर पंद्रह करोड़ से उपर के लोगों द्वारा बोली जाने वाली,पाँच देशों की प्रमुख मातृभाषा,विश्वविद्यालीय शिक्षा में पढ़ाई जाने वाली तथा सिनेमा उद्योग में पॉलीवुड के नाम से प्रसिद्ध भोजपुरी के समक्ष आज अपने अस्तित्व का संकट आन खड़ा हुआ है। भिन्न-भिन्न प्रकार की साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं से समृद्ध, राजनीतिज्ञों के संबोधन की आधार भाषा वर्त्तमान मे आज संकट में है। ब्रिटिश काल में गुलाम बना कर ले जाये गये भोजपुरी प्रदेश के मजदूर भले ही आज मॉरीशस, सुरीनाम,…

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“ऑल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन बरेली” के द्वारा ‘संजय गांधी कम्युनिटी प्रेक्षागृह’ बरेली में ‘Short Film Festival’ का सफल आयोजन संपन्न

बरेली: “ऑल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन बरेली” के द्वारा दिनांक 03 अक्टूबर 2018 को ‘संजय गांधी कम्युनिटी प्रेक्षागृह’ बरेली में ‘Short Film Festival’ का सफल आयोजन संपन्न हुआ | इस आयोजन के पीछे प्रेरणा फिल्मकार रंजीत वालिया जी की तथा मार्गदर्शन उक्त एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बरिष्ठ रंगकर्मी श्री जे. सी. पालीवाल साहब का था | इस कार्यक्रम का संचालन मेरे (सुरेश ठाकुर) द्वारा किया गया |फेस्टीवल में विभिन्न विषयक बीस लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया | निर्णायक मण्डल में श्री श्रीकांत सक्सेना (Programming Head, D.D. Urdu) तथा नितिन कुमार…

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