जेपी सिंह, असिस्टेंट एडिटर ICN ग्रुप
लखनऊ। भारत की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में बसती है| गाँव बदहाल शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और विकास के सभी विन्दुओ पर पिछड़ा है| गाँव और गाँव पंचायत की पहुँच विकास खण्ड स्तर तक नहीं हो पाती है| शिक्षा और स्वास्थ्य तो बुनियादी ज़रूरत है| रोजगार और उद्योग की सुविधाएँ भी गाँव के किसानों से दूर हैं|
सिंचाई व्यवस्था ठीक न होने के कारण उनकी फसल भी अच्छी नही हो पाती है| मण्डी में उचित दाम न मिलने से किसान पिछड़ता जा रहा है। आधारभूत सुविधाएँ न होने के कारण गाँव से पलायन हो रहा है| शहरों में रोजगार की तलाश में भटक रहा ग्रामीण युवक बेरोजगारी के कारण न्यूनतम जीवन जीने के लिए विवस है।
सरकार कोई भी हो, ग्रामीण भारत विकास के ऐजेण्डे में बहुत पीछे है। गाँव के विकास के लिए विकास खण्ड स्तर पर मूल सुविधाएँ देनी होगी| इसकी तरफ किसी सरकार का ध्यान नही है चाहे वह प्रदेश की सरकारें हों या केंद्र की सरकारें| गाँव को मूल सुविधाएँ देना सरकार के एजेंडे में नही हैं शायद| यह सोचनीय विषय है।
गाँव के लोगों को शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल और स्वास्थ्य की सुविधाओं के लिए अच्छे हास्पिटल सरकारें नहीं दे पा रही हैं| गाँव में रोजगार के लिए उद्योग भी नही है| विकास खण्ड स्तर पर सरकार अपने कर्मचारियों को रोक नही पा रही है क्योंकि वहाँ सुविधाएँ और अच्छी व्यवस्था न होने के कारण अधिकांश सरकारी कर्मचारी प्रतिदिन शहर से गाँव और गाँव से शहर सफर करतें है|
क्या ऐसी हालत में गाँवों का विकास सम्भव है? ज़रूरत है कि गाँवों के विकास पर सरकारों का ध्यान केंद्रित हो| अगर ऐसा न हुआ तो भारत विकास में निरन्तर पिछड़ता जाएगा और उसका ग्रामीण क्षेत्र भी| भारत गाँवों का देश है इसलिए विकास का केंद्र बिंदु गाँव होना चाहिए।
