लखनऊ: अदबी संस्थान तथा प्रतिष्ठा फिल्म्स् एण्ड मीडिया के संयुक्त तत्वावधान में होली की पूर्व संध्या पर ‘काव्य के रंग’ समारोह का आयोजन सिटी होटल, लालबाग, लखनऊ के प्रांगण में सम्पन्न हुआ|
इस अवसर पर समस्त अतिथियों ने काव्य की भाषा में होली की बधाई दी। वरिष्ठ शायर संजय मिश्रा ‘शौक़’ ने पढ़ा-
दुनिया का यक़ीं खुद का गुमां हो जाना,
आकाश के आँचल में निहां हो जाना,
खैरात उजालों की कहाँ तक देगा,
दीपक का मुकद्दर है धुआँ हो जाना|
लखनऊ के लोकप्रिय शायर तथा समारोह के विशिष्ट अतिथि जनाब इरफान लखनवी ने होली के हवाले से दो पंक्तियां पढ़ी-
रंगों की बौछार का मौसम आया है,
तेरे मेरे प्यार का मौसम आया है।
कितने बरसों प्यासी आँखें तरसी हैं,
जब तेरे दीदार का मौसम आया है।
अदबी संस्थान के अध्यक्ष एवं कवि तरुण प्रकाश ने अपनी गज़ल के ये शेर बहुत पसंद किये गये-
चले आओ, ज़रूरी है मिलन, दिलदार होली में,
बहाने छोड़ दो तुम कम से कम, इस बार होली में।
मसर्रत हो, दुआयें हों, ख़ुशी के रंग हों जिसमें,
निकाले हम सभी मिलकर, नया अखबार होली में।
हिन्दी के जाने-माने लेखक सुहैल काकोरवी ने होली को विषय बनाते हुए इन पंक्तियों से खूब वाहवाही लूटी-
बहुत ही प्यार से मिलता है वो जाने वफ़ा होली,
बनी जाती है मतवाली मोहब्बत की अदा होली।
वो अंगारों को रंगों में डुबोकर मुस्कुराता है,
ये कैसा खेल है तू ही ज़रा मुझको बता होली।
इसके अतिरिक्त आई.सी.एन. के न्यूज़ एडिटर प्रो0 सत्येन्द्र कुमार सिंह ने अपनी कविता पढ़ते हुए बदलते सामाजिक परिस्थिति को रेखांकित किया जिसके बोल थे-
किसी शरारती
बच्चे की बस्ते
की माफ़िक
खाली भावों का पिटारा ।
पितृ-भाव
की स्थिर आँखे,
देखती है
मोल-भाव होते हुए,
काँधे के झूलों का ।
अस्पष्ट राहों में
अकेले कदम
वृद्धावस्था का,
और ढान्ढस
इस बात का
कि
मर्द नहीं रोते ।
इस अवसर पर अमरेश कुमार सिंह असिस्टेंट एडिटर आई.सी.एन तथा आलोक सिंह एसोसिएट एडिटर आई.सी.एन ने भी काव्य के माध्यम से होली के अवसर पर प्रेम व भाईचारे का संदेश प्रसारित किया।
इस कार्यक्रम का संचालन हास्य व्यंग की शैली में प्रसिद्ध हास्य व्यंग्यकार एवं आई.सी.एन. के एसोसिएट एडिटर अखिल आनन्द ने किया।

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