केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – छाई घटा घनघोर सखी री आओ मेहंदी रचाएं गायिका – सरोज मिश्रा संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही https://youtu.be/M_FP14Uw4XA गायिका सरोज मिश्रा का जन्म रवींद्र संगीत के प्रसिद्ध स्थान कोलकाता में हुआ था। पिता के भारत सरकार की सेवा में होने के करण इन्हें देश के अलग अलग स्थानों पर रह कर विभिन्न संगीत उस्तादों के सानिध्य में क्लासिकल व सेमी क्लासिकल संगीत की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ…
Read MoreYear: 2020
उर्दू शायरी में ‘बारिश’ : 1
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप बारिश, बरसात या सावन – ये केवल झर झर झरते पानी का ही मौसम नहीं है बल्कि ये मदमस्त कर देने वाली सोंधी सोंधी कच्ची खुश्बू का भी मौसम है। यह दुनिया के सभी साहित्यों के सबसे पसंदीदा विषय है। प्रेम का, इश्क का और मोहब्बत का हर रंग इसमें कभी गुनगुनाता हुआ, कभी मुस्कराता हुआ और कभी आँखों मे छलछलाता हुआ मौजूद है। बरसात संयोग का भी मौसम है और वियोग का भी। जिस का प्रेमी साथ में है, बारिश उसे अपनी…
Read Moreराष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 1 जुलाई: वास्तव में चिकित्सक ही हैं असली कोरोना योद्धा
डॉ अनुरूद्ध वर्मा, एडीटर-ICN विश्व में चिकित्सकों के सेवाओं का स्मरण करने एवं सम्मान प्रदर्शित करने के लिए अलग अलग देशों में बिभिन्न तिथियों में चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) का आयोजन किया जाता है। भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का आयोजन 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री एवँ प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ विधान चंद्र राय की स्मृति में उनके निर्वाण दिवस के अवसर पर किया जाता है । डॉ विधान चंद्र राय का जन्म 1 जुलाई 1882 एवँ निधन 1 जुलाई 1962 को हुआ था । चिकित्सा क्षेत्र में…
Read Moreगीत-गीता : 6
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) (छंद 1-7) संजय : (श्लोक -1) शोकाकुल अर्जुन बैठे, व्याकुल आहत निष्क्रिय से। नयनों में नीर भरे हैं, चिंतित ‘होनी’ के भय से।।(1) तूफानों में ज्यों नैया, पतवार रहित हो डोले। यह दशा देख अर्जुन की, मधुसूदन उनसे बोले।।(2) श्रीकृष्ण : (श्लोक 2-3) कौंतेय, उचित क्या अवसर, इस भाँति आचरण का है? जब प्रश्न युद्ध में केवल, विश्वास जागरण का है।।(3) हे वीर सखा, यह क्रंदन, उस पर…
Read Moreराष्ट्र की कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ और उसका समाधान : ICN मीडिया हाउस का एक प्रयास
By: Dr. Bhola Nath Mishra, Head-EHS, Regional Convener-SJM (U.P. & U.K.) & Sr. Consulting Editor-ICN Group भारत गाँवों में बसता है और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि है। ये भारत का सौभाग्य कहिये कि खेती योग्य सर्वाधिक भूमि, अनुकूल जलवायु,ऋतुयें, कृषि हेतु आवश्यक प्राकृतिक संसाधन,जैव वैविध्य एवं कार्य करने वाले युवा हाथ भी उसी के पास हैं परन्तु विडम्बना देखिये कि अधिकांश खाद्यान्नों जैसे दलहन, तिलहन आदि के लिये ये राष्ट्र परमुखापेक्षी अर्थात विदेशों पर अब भी निर्भर है ? जब एक विकाशशील राष्ट्र अपनी आय का बड़ा…
Read Moreग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम के द्वारा आई.सी.एन. इंटरनेशनल के पत्रकारो ने “स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वाभिमान” का बिगुल बजाया
एज़ाज़ क़मर, एसोसिएट एडिटर-ICN नई दिल्ली। “ग्रीन स्पॉट्स अंडर आई०सी०एन० रूलर एंटरप्रेन्योरशिप सीरीज़ – 1” नामक शीर्षक से दिनांक 28 जून को 2020 को आई०सी०एन० मीडिया हाउस द्वारा महाबली इंटर कॉलेज हसनापुर (मलिहाबाद), लखनऊ मे वेब-संगोष्ठी व वेब-कार्यशाला (वेबिनार व वेबशाप) का आयोजन किया गया जिसमे 11 ग्राम सभा के 55 गांवों के प्रतिनिधियो ने भाग लिया।आई०सी०एन० मीडिया हाउस को पत्रकारो की समाज सेवी संस्था आई०सी०एन० ट्रस्ट संचालित करती है, जिसका उद्देश्य पत्रकारिता के मूल्यो की रक्षा करना और भावी पत्रकारो को प्रशिक्षण देकर उन्हे पत्रकारिता की मुख्यधारा से जोड़ना…
Read Moreशहद से मीठी ज़बान उर्दू की शायरी से जन्मी दिल्ली की गंगा-जमुनी तहज़ीब का आख़िरी चिराग़ बुझ गया
एज़ाज़ क़मर, एसोसिएट एडिटर-ICN क्या किसी एक शायर के चले जाने से शायरी के सफर को लगाम लग जाती है? क्या मिर्ज़ा ग़ालिब के इंतेकाल से उर्दू का कारवां रुक गया? क्या एक इंसान के गुज़र जाने से साझा विरासत तितर-बितर होकर बिख़र जाती है? क्या महात्मा गांधी के निधन से हिंदू-मुस्लिम एकता खत्म हो गई? ज़ाहिर सी बात है कि इन सभी सवालो के जवाब मे कहा जायेगा, कि “किसीे एक व्यक्ति के होने या ना होने से कोई असर नही पड़ता है और दुनिया चलती रहती है”,किंतु यह…
Read Moreमेरी ग़ज़ल
सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप नहीं आसां जुनूने इश्क़ में हुशिआर हो जाना कि जैसे नींद का हमला हो और बेदार हो जाना Consciousness is not easy in love lunacy As in the attack of sleep for awakening no possibilty कहानी हो गए वो दिन कि जब खुशियां छलकती थीं तेरा सरशार हो जाना मेरा सरशार हो जाना Became tale those days when spilled around the glee And are no more my frenzy and too your frenzy न घर से वो निकलता है न मैं इक खौफ है ऐसा कहाँ…
Read Moreरूरल इंटरप्रिन्यूरशिप : आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप
लखनऊ। क्या मात्र तथ्यों व घटनाओं का संप्रेषण मात्र ही पत्रकारिता है या पत्रकारिता कहीं इससे आगे भी उपस्थित है। सत्यता यह है कि समय निरंतर बहता है और पत्रकारिता समय की इसी यात्रा को लिपिबद्ध करने का कार्य करता है। जब हम बीते हुये समय को लेखबद्ध करते हैं तो उसे ‘इतिहास’ कहते हैं और जब वर्तमान को लिखा जाता है तो उसे ‘पत्रकारिता’ कहते हैं। इतिहास लिखते समय हमारा ‘अनुभव’ हमारा मित्र होता है और पत्रकारिता करते समय हमारा ‘विवेक’। ‘इतिहास’ के लेखन में हमें अतीत में झांकना…
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