मेरी ग़ज़ल

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप
नहीं आसां जुनूने इश्क़ में हुशिआर हो जाना
कि जैसे नींद का हमला हो और बेदार हो जाना
Consciousness is not easy in love lunacy
As in the attack of sleep for awakening no possibilty
कहानी हो गए वो दिन कि जब खुशियां छलकती थीं
तेरा सरशार हो जाना मेरा सरशार हो जाना
Became tale those days when spilled around  the glee
And are no more my frenzy and too your frenzy
न घर से वो निकलता है न मैं इक खौफ है ऐसा
कहाँ मुमकिन है ऐसे में विसाले यार हो जाना
She does not come out of home and also I in a fear
So how can togetherness be possible in such terror
 वही क़ादिर उसी का आसरा है हम तो बेबस हैं
कहाँ बस में है तूफाने बाला से पार हो जाना
He is Omnipotent  trust his mercy, we are powerless surely
It is never in our command to cross storm of catastrophe
ख़ुशी और ग़म की है तफ्सील इस इजमाल में पिन्हाँ
किसी का फूल हो जाना किसी का खार हो जाना
The detail of joy and sorrow lie in this interesting brevity
That someone turns flower and thereafter  thor,see relativity.
यही उम्मीद रखना चाहिए ईमान वालों को
वही रोकेगा इस दुनिया का महशर ज़ार हो जाना
The believers must place reliance upon this reality
That God shall block the way of doom to come in world definitely
सुहैल ऐसे हुए हालात खाना क़ैद हैं इंसां
कभी देखा नहीं यूँ ज़िन्दगी दुश्वार हो जाना
The human being are confined in their homes seeing times gravity
No one has ever seen the life so terror stricken and in misery

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