राणा अवधूत कुमार, ब्यूरो चीफ-ICN बिहार
पटना। चीन-भारत के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने का कार्यक्रम कोरोना वायरस के प्रकोप से खत्म हो गया। लेकिन वर्षगांठ के मौके पर एक-दूसरे को बधाई संदेश देने की औपचारिता निभायी गई। एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद चीन-भारत के संबंध बहुत मजबूत होंगे, दोनों देश नई ऊंचाइयों को छुएंगे। लेकिन इस दौर में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर सियासी गतिविधियां तेज हुई हैं, विशेष रूप से कोरोना को ले अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ एक गुट तैयार है उसमें भारत की अहम भूमिका है भारत ने आधिकारिक तौर पर 62 देशों के साथ यूरोपीय यूनियन व ऑस्ट्रेलिया की ओर से कोरोना वायरस फैलाने के जिम्मेदार कारणों की जांच की मांग करने वाले प्रारूप प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उस पर हस्ताक्षर कर दिए है। यह जांच मुख्यत: चीन व विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका को लेकर है। वहीं 120 देशों ने विश्व स्वास्थ्य महासभा की 18 मई को आयोजित वर्चुअल वार्षिक बैठक में स्वतंत्र जांच की मांग उठाई, जिसमें भारत भी शामिल था। इससे पड़े दबाव के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन व चीन दोनों ने कोरोना के वैश्विक प्रसार के कारणों की स्वतंत्र जांच के लिए विवश हो हामी भरी है। चीन को विवश हो कहना पड़ा कि अगले दो वर्षों तक इससे निबटने में विकासशील देशों को दो अरब डॉलर की सहायता देगी।यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुई, जब भारत विश्व स्वास्थ्य महासभा के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष बना।भारत द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग विदेश नीति की दृष्टि से सार्थक कदम है। भारत अब गुटनिरपेक्ष देश नहीं रह गया है जिसकी विश्व महाशक्तियों के समक्ष कई मुद्दों पर मौन रहना विवशता थी।
एक अप्रैल को पूरे हुए भारत-चीन संबंध के 70 वर्ष
एक अप्रैल 2020 को भारत-चीन के बीच राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे हो गए हैं। बीते सालों में भारत-चीन संबंधों में कुछ मामूली टकरावों के बावजूद रिश्तों में प्रगाढ़ता आई है। दोनों देश एक असाधारण विकास पथ से होकर गुजरे हैं। 1950 के दशक में दोनों देशों ने राजनयिक संबंध स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। संयुक्त रूप से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों की वकालत की। दोनों ही देश शांति-मैत्रीपूर्ण परामर्श के माध्यम से सीमा विवाद को आसानी से हल करने व द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने के पक्षधर रहे हैं। एक अप्रैल 1950 को भारत-चीन के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए, भारत चीन के साथ संबंध बनाने वाला पहला गैर समाजवादी देश था। उस समय हिंदी चीनी भाई-भाई एक तकिया कलाम बन गया। हालांकि बाद में इन दोनों देशों के संबंध में कई तरह के उतार-चढ़ाव आए।लेकिन वैश्विक आपदा कोरोना में यह संबंध एक बार फिर उलझती नजर आ रही है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुवा चुनयिंग ने कहा था कि पहले, बहुत बहुत बधाई, चीन-भारत के बीच द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की 70 वीं वर्षगांठ, दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए सैन्य आदान-प्रदान के अलावे सांस्कृतिक, धार्मिक, व्यापार गतिविधियों के अन्य 70 महत्वाकांक्षी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। दोनों देश के कोरोना महामारी से निपटने में कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पिछले साल 11-12 अक्तूबर को ममल्लापुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के लिए समारोह को मनाने के लिए 70 कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया था। उन्होंने कहा कि उनमें कुछ कार्यक्रम महामारी से प्रभावित होंगे। लेकिन हमारे आदान-प्रदान व महामारी के बाद मजबूत बनेंगे। उम्मीद है कि हम अपने रिश्तों में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।कोरोना के प्रसार में चीन की भूमिका ले जांच की मांग में भारत की सहमति व अमेरिका के साथ जाने से दोनों के संबंध में दूरगामी असर पड़ सकता है। वह भी तब जबकि दोनों के राजनयिक संबंध के 70 वर्ष पूरा होने के बाद कई तरह के आयोजनों व कार्यक्रमों का निर्धारण पूर्व से किया गया था।
