पटना। आस्था और संस्कार के पर्व छठ का उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ समापन हो गया है। बुधवार सुबह नदी, तालाब और नहरों के पानी में उतरकर महिलाओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया और संतान के कल्याण के लिए मुरादें मांगी। अर्घ्य देने के बाद छठी मइया के लिए बनाए गए खास ठेकुआ और प्रसाद लोगों में बांटा गया। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत 11 नवंबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ था। इस दौरान लोग भक्ति भाव में डूबे नजर आए और नदियों के किनारे आस्था का सैलाब देखने को मिला।इस बार देश भर में छठ की छटा देखकर अहसास हुआ कि यह अब कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर चेन्नै और मुंबई हर जगह एक समान आस्था और श्रद्धा के साथ लोगों ने छठ का महापर्व मनाया। बिहार में पटना कॉलेज घाट पर महिलाओं ने तड़के सवेरे घाट पर जाकर पूजा की तैयारी की और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।इस दौरान घाटों पर प्रशासन की तरफ से खास इंतजाम भी किए गए। महिलाओं के साथ उनके पति और बच्चे भी घाटों पर नजर आए। छठ बिहार- झारखंड का मुख्य पर्व है। इसलिए यहां त्योहार की खास धूम देखने को मिली। वहीं यूपी के पूर्वांचल मे स्थित वाराणसी में गंगा नदी के घाटों के किनारे महिलाओं ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इसी तरह ओडिशा के भुवनेश्वर में कुअखई नदी के किनारे भी महिलाओं ने उगते सूर्य को जल चढ़ाया। इस दौरान घाटों पर लोग गन्ने भी हाथ में लिए रहे। छठी मैया की आस्था का अद्भुत संगम आज देशभर के घाटों के किनारे देखने को मिला। सूर्य को अर्घ्य देकर लोगों ने छठी मैया के गीत गाए और प्रसाद खाकर व्रतियों ने व्रत तोड़ा।आज सुबह तड़के गाजियाबाद में भी घाट पर पूजा का अद्भुत नजारा दिखा। रात के अंत और सुबह की शुरुआत के दौरान अंधेरे और रोशनी के बीच जो घमासान चल रहा था, जलते हुए दीपकों ने भी रोशनी का साथ दिया। इसी तरह दिल्ली में यमुना के घाट पर छठ पूजा के पंडाल और श्रद्धालुओं की भीड़ दिल्ली नहीं हरिद्वार के गंगा घाट का अहसास हो रहा था। इससे पहले मंगलवार को नदी में उतरकर अस्त हो रहे सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया गया। इस दौरान घाटों पर नए वस्त्र धारण कर पूजन करने लोग पहुंचे थे। छठ का व्रत काफी मुश्किल होता है इसलिए इसे महाव्रत भी कहा जाता है। इस दौरान छठी देवी की पूजा की जाती है। छठ देवी सूर्य की बहन हैं लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं।बता दें कि हर साल दिवाली के छठे दिन यात्री कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता है। इसकी शुरुआत चतुर्थी को नहाय-खाय से होती है। अगले दिन खरना या लोहंडा जिसमें गन्ना के रस से बनी खीर प्रसाद के रूप में दी जाती है। षष्ठी को डूबते सूर्य और सप्तमी को उगते सूर्य को जल चढ़ाकर इस पर्व की समाप्ति होती है। छठी मइया को अर्घ्य देकर संतान प्राप्ति और उनके अच्छे भविष्य की कामना की जाती है।
उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ का समापन

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