सत्येन्द्र कुमार सिंह ( सहायक संपादक-ICN हिंदी )
लखनऊ: संजय बी. जुमानी से पूछा जाए तो ३१ यानी ४ नंबर को बहुत ही सशक्त अंक मानेंगे| आज ३१ अक्टूबर की तारीख अपने आप में दो महत्वपूर्ण शक्सियत के जीवन से जुड़ी हुई है|
जहाँ एक ओर ५६२ रियासतें को एक भारत के रूप में जोड़ने वाले सरदार पटेल का आज जन्मदिवस है वहीं देश को आगे एवं मजबूत रखने में अपना योगदान देने वाली श्रीमती इंदिरा गाँधी का आज बलिदान दिवस भी है|
इसमें कोई अचरज नहीं कि दोनों ही लौह एवं अटल विचारों के धनी थे| प्रथम गृह मंत्री के तौर पर पटेल जी ने अपने मजबूत इरादों और सत्यता पूर्ण मंशा से देश को एक सूत्र में बांधा|
१९४७ के बाद की यह बहुत बड़ी चुनौती थी जिसे उस लौह पुरुष ने अपने विवेक और दृढ निर्णय से बखूबी निभाया| देश उनके इस योगदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा|
एक सूत्र में बंधने के उपरांत देश ने अनेक उतार और चढ़ाव देखे| गरीबी को दूर करना एक चुनौती था| ऐसे में इंदिरा गाँधी ने गरीबी हटाओ के नारे ने एक नयी दिशा प्रदान की| बैंकों के राष्ट्रीयकरण का चुनौतीपूर्ण कार्य भी इंदिरा सरीकी नेतृत्व से ही संभव था|
१९७१ के उस युद्ध को कौन भूल सकता है जब बांग्लादेश का निर्माण हुआ| विश्व ने भारतीय नारी शक्ति और दृढ़ता का एक और परिचय प्राप्त किया| अपने इसी योगदान और संकल्प शक्ति की वजह से संसार उन्हें लौह स्त्री के रूप में जानता है|
पटेल का हो जन्मदिवस या तारीख इंदिरा के निर्वाण का,
दोनों का योगदान अमर है, योगदान भारत निर्माण का|
जय हिन्द!

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