पत्रकारों की आध्यात्मिकता की राह कठिन क्यों है ॽ

By: Gopal Misra भारतीय पत्रकारिता प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों ही अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं। जब लोग खुले तौर पर कहते हैं कि उनके पास एक राष्ट्रीय टेलीविजन समाचार चैनल को ब्लैकलिस्ट कर रखा है या एक प्रबुद्ध पाठक समाचार पत्र विक्रेता को दैनिक समाचारपत्र के बजाय टिशु पेपर बेचने के लिए कहता है तब यह बात स्पष्ट हो जाती है। मेनस्ट्रीम मीडिया प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों के पत्रकारों को अनुबंध की नौकरियां देना दोषपूर्ण है। नए श्रम कानून के साथ वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट पत्रकारों के किसी…

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आस्ट्रेलिया का सर्वाधिक शिक्षित समूह-प्रवासी भारतीय

डॉ अशोक कुमार शर्मा अंग्रेजों के विपरीत हम भारतीयों की ख़ास आदत होती है, अजनबी लोगों से बात करना। नयी दिल्ली से आस्ट्रेलिया जा रहे, एयर इण्डिया के बोईंग विमान ने जैसे ही सिडनी एयरपोर्ट को स्पर्श किया, मेरे पड़ौस में बैठी अधेड़ पंजाबी महिला ने अपना मोबाइल फोन ऑन कर लिया। सुबह के सात बजे थे। बारह घंटे से अधिक के सफ़र में उस महिला मुझसे या मेरी पत्नी से कोई बात नहीं की थी। लेकिन अचानक उसने अपना मोबाइल फोन मेरे सामने करते हुए कहा, “इसमें चर्च स्ट्रीट…

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कोरोना वायरस : त्रासदी में शगुन-2

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  विश्व आज भयानक त्रासदी की ओर फिसल रहा है। हम सब संभव-अंसभव के मध्य खिंची महीन रेखा पर बार बार असंतुलित होते संतुलन को बनाये रखने के अथक प्रयास में जी जान से लगे हैं। शारीरिक विश्राम व मानसिक उत्थान का समय दिशाहीन होकर जानवरों के झुंड के समान भागने में न‌ केवल हमने अपनी क्षमताओं को नष्ट किया है बल्कि हमारी रचनात्मकता भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई है। हमारी शक्ति, बल व क्षमता का दिशाहीन होकर व्यय हो जाना न केवल…

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कोरोना वायरस : त्रासदी में शगुन-1

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  विश्व आज भयानक त्रासदी की ओर फिसल रहा है। हम सब संभव-अंसभव के मध्य खिंची महीन रेखा पर बार बार असंतुलित होते संतुलन को बनाये रखने के अथक प्रयास में जी जान से लगे हैं। मनुष्य की विकृति ने आज उसे उसकी औकात बता दी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज संपूर्ण विश्व उस बिंदु पर खड़ा है जहाँ मात्र हमारी समझदारी, आत्मविश्वास, सतर्कता, सावधानी और अनुशासन ही हमारे सुरक्षा कवच हैं। जहाँ विश्व के बड़े-बड़े एवं पूर्ण विकसित देश कोरोना…

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जब इंसान से इंसान डरने लगे

लेखक : डॉक्टर मोहम्मद अलीम, संपादक, आइसीएन ग्रुप नई दिल्ली। आज देश व्यापी लोक डाउन का पांचवां दिन है। यह सिलसिला अगले १५ अप्रैल तक जारी रहने वाला है। आज तक के आंकड़े के मताबिक भारत में अबतक तीस लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है और एक हजार से ज़्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। पूरी दुनिया में यह आंकड़ा तीस हजार को पार कर चुका है। बड़े बड़े शक्तिशाली देश इसके आगे पस्त दिखाई दे रहे हैं जैसे अमेरिका, फ्रांस, चाइना, इटली, स्पेन और इंग्लैंड वगैरह।…

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बाबूराव विष्णु पराड़कर जी पत्रकारिता के आदर्श स्तम्भ

संदीप कुमार सिंह • मीडिया विमर्श राजनैतिक मुद्दों पर बहुत ही सगजता से सरल भाषा में लेख लिखने में माहिर पत्रकारों की फेहरिस्त में पराड़कर जी का नाम सबसे उपर आता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी पत्रकारिता को जनजागरण के रुप में इस्तेमाल करने वाले पत्रकार के रुप में भी पराड़कर जी का नाम शुमार हैं। सम्पादकाचार्य पण्डित बाबूराव विष्णु पराड़कर भारत, भारतीय और भारतीयता के  उन्नायक थे। राष्ट्र की मुक्ति और समाज की सर्वांगीण उन्नति के लिए इन्होंने 50 वर्षो तक प्रचंड साधना की। राष्ट्रीय जागरण, राष्ट्रभाषा की गौरव…

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मशाल बनाम कुल्हाड़ी

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  आखिर एक समाज में पत्रकारिता की क्या भूमिका होनी चाहिए? क्या मात्र तथ्य को तथ्य रूप में प्रस्तुत से और सत्य को सत्य कहने से पत्रकारिता की भूमिका का निर्वहन हो जाता है अथवा पत्रकारिता इससे भी आगे की चीज है? ‘समाज कैसे यात्रा करता है?’ प्रश्न रोचक था लेकिन अत्यंत गंभीर भी। जब यह प्रश्न मेरे सामने आया था तो कुछ देर तक तो मैं मात्र प्रश्न को समझने और उसकी तह में जाने की कोशिश करता रहा और कुछ पलों के…

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: नमन करते हैं सर सी वी रमन को।

आकृति विज्ञा, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN UP बहुत वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के बलिदान के लंबे संघर्षों के बाद विज्ञान ने खुद को स्थापित किया। आज समाज में धर्म को भी व्याख्यायित करने के लिये लोग वैज्ञानिक तर्कों की बात करते हैं जिसके लिये वास्तव में वैज्ञानिक समाज बधाई का पात्र है।लेकिन एक बात हमें समझ लेना है कि कुछ भी अर्थात् जो हम बक दें वही विज्ञान नहीं हो जाता ।विज्ञान की स्पेसिफिक मेथडोलाजी है जो आधुनिक विज्ञान के मानदंड तंय करती है।विज्ञान का यह सुखद समय भी है किंतु पीड़ा…

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शिक्षा व समाज के वास्तविक शिल्पकार थे डॉ. राधाकृष्णनन

राणा अवधूत कुमार, ब्यूरो चीफ-ICN बिहार  पटना। पांच जनवरी को लखनऊ के एक होटल में आयोजित समारोह में आईसीएन के मंच पर देश के छह महान शख्सियतों को सम्मानित किया गया। समारोह देश की इन छह वैश्विक व्यक्तित्व को समर्पित रहा। जिसमें दूसरा नाम देश के पहले उपराष्ट्रपति व दूसरे राष्ट्रपति रहे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का था। पेशे से शिक्षक व बाद में राष्ट्रपति का पद संभालने वाले डॉ. राधाकृष्णनन को आईसीएन मीडिया ग्रुप के मुख्य सलाहकार प्रो. केवी नागराज ने श्रद्धांजलि दी। एक शिक्षक होने के बावजूद राष्ट्र के…

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बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व थे रवींद्रनाथ ठाकुर

राणा अवधूत कुमार, ब्यूरो चीफ-ICN बिहार  पटना। पांच जनवरी को लखनऊ के एक होटल में आयोजित समारोह में आईसीएन के मंच पर देश के छह महान शख्सियतों को सम्मानित किया गया। समारोह देश की इन छह पटना।वैश्विक व्यक्तित्व को समर्पित रहा। जिसमें पहला नाम गुरू रवींद्रनाथ टैगोर का था। हिन्दी-बांग्ला साहित्यकार के साथ रवींद्रनाथ टैगोर ने एक चित्रकार, कलाकार, नाटककार, रंग कर्मी, पत्रकार व कला के क्षेत्र में देश को सुशोभित किया था। उन्हें श्रद्धांजलि आईसीएन वर्ल्ड की संपादक बर्नाली बोस के अपने शब्दों में श्रद्धांजलि दी गयी। रवींद्रनाथ टैगोर…

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