मां-थी, प्रभु–सी  

By: C.P. Singh, Literary Editor-ICN Group एक वो- दिन थे, मां थी – प्रभु सी, तन- मन, दुःख से परे । अब तो सुधि है, निधि सी उसकी, सकल- कलेश – भरे । एक वो दिन थे, कुछ भी जिद की, मां –भण्डार –भरे । अब तो लगे, हूं- हठ- प्रकृति की, मां- हित- नयन- झरे । एक वो दिन थे, गोद में मां की, जग के सुख- सगरे । अब तो तन चले, कृपा उसी की, को – कहां- रुहठि करें ? एक वो दिन थे, मां- रक्षक थी,…

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मैं और मेरी कविता

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. बहुत देर तक मेरी कविता मेरे साथ टहलती रही हम दोनों ने ख़ूब बातें की तुम्हारी बात आते ही झगड़ गये हम दोनो फिर दोनो ख़ामोश थे….. आज तक कायम है ख़ामोशी मुझको मनाना चाहती है वो उसे मनाना चाहती हूँ मैं मेरे पास छूट गयी है उसकी लय वो ले गयी है मेरा बिखरना….. इन दिनो चाँद तारे सब  बनाते हैं समद्विबाहु त्रिभुज एक दूसरे को सोचकर मौन हैं आधार के दोनो कोनों पर  टिकी सी मैं और मेरी कविता……. मैं देखती…

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विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर विशेष: हल्के में ना लें उच्च रक्तचाप को -सतर्क रहें, नियंत्रित रखें और स्वस्थ जीवन जियें ।

डॉ अनुरूद्ध वर्मा एम डी(होम्यो ) वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, सीनियर एसोसिएट एडीटर-ICN ग्रुप विश्व उच्च रक्तचाप दिवस प्रतिवर्ष 17 मई को मनाया जाता है। उच्च रक्तचाप की समस्या की गंभीरता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दुनिया मे लगभग 1 अरब 30 करोड़  लोग इससे प्रभावित हैं वंही पर देश में लगभग 30 करोड़ से अधिक लोग इससे पीड़ित हैं । साइलेंट किलर के नाम से प्रसिद्ध  यह रोग दुनिया में अकाल मृत्यु का प्रमुख कारण है । उच्च रक्तचाप की समस्या की गंभीरता को देखते हुये…

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प्रवासी मजदूर: भूत वर्तमान और भविष्य

डॉ अनुरूद्ध वर्मा, एम डी(होम्यो ) वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, सीनियर एसोसिएट एडीटर-ICN ग्रुप  बेहतर आमदनी एवँ अच्छे जीवन की उम्मीद लिये देश के गॉवों के करोड़ों मजदूर भिन्न-भिन्न राज्यों में मजदूरी करने के लिऐ  मजबूर हैं । अपना गांव, वतन, जमीन छोड़कर जीवकोपार्जन के लिए  दूसरी जगह जाने के लिए विवश इन मजदूरों को परदेश कमाने वाला एवं आधुनिक भाषा में प्रवासी मजदूर कहा जाता है ।यह मजदूर वहां  राजगीरी, रिक्शा चलाना, ईंट गारा देना, ईंट भट्ठे पर काम करना, फ़ैक्टरियों में छोटी मोटी नौकरी करना, बढ़ाईगीरी, ठेला लगाना, रंगाई…

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समय का गीत: 7

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने।   बाग वो‌ जलियानवाला, गोलियों की सनसनाहट। क्रूर नरसंहार, मौतें, खून, चीखें, छटपटाहट।। मौत थी आज़ाद ने चूमी, भगत फाँसी चढ़े थे। लोग गाँधी की डगर पर, एकजुट होकर बढ़े थे।।   खून का था पर्व जिसके मध्य भारत बँट गया था। एक टुकड़ा देश, पाकिस्तान बन कर कट गया था।। गोलियाँ खा वक्ष पर, चुप हो गये निर्भीक गाँधी। विश्व रोया…

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समय का गीत: 6

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने।   काल ने देखे हज़ारों युद्ध यूँ तो रक्तरंजित। जंग ऐसी भी छिड़ी जिसमें हुआ यह विश्व खंडित।। वैश्विक था युद्ध पहला, उम्र बावन माह की थी। लड़ रहा था विश्व सारा, ऋतु भयानक दाह की थी।।   दूसरा भी युद्ध वैश्विक था, भयानक वो समर था। कौन था दुनिया में जो इसके असर से बेअसर था।। दो शहर जापान के बलि…

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चिरायता के फायदे और नुकसान

By: Dr. Ripudaman Singh, Associate Editor-ICN  &  Dr.Hemant Kumar, Asstt. Editor-ICN स्विर्टिया चिरेटा (Swertia Chirata) को भारत में चिरायता के रूप में जाना जाता है। स्विर्टिया चिरेटा इसका वैज्ञानिक नाम है। यह एक वार्षिक जड़ी बूटी है जो भारत भर में मिलती है और इसकी ऊंचाई 1.5 मीटर तक होती है। संस्कृत में इस जड़ी-बूटी को भूनिम्ब या किराततिक्त कहा जाता है। इस प्राचीन जड़ी बूटी को नेपाली नीम के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह नेपाल के जंगलों में एक आम पेड़ है। इस पौधे के बारे में सबसे पहले 1839 में यूरोप…

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पुलिस और जनता

मोहम्मद सलीम खान, सीनियर सब एडिटर-आईसीएन ग्रुप साठ के दशक में  हिंदी सिनेमा  की सबसे कामयाब फिल्म मुग़ले आजम बनी थी। फिल्म में मुख्य भूमिका अकबर ए आजम, शहजादा सलीम, व अनारकली की थी। फिल्म के अंत में मुगल शहंशाह अकबर अनारकली से मुखातिब होकर कहते हैं  “अनारकली  बखुदा हम मोहब्बत के दुश्मन नहीं लेकिन अपने उसूलों के गुलाम हैं। एक गुलाम की बेबसी पर  गौर करोगी तो शायद तुम हमें माफ कर सको।” सहसवान/बदायूं: फिल्म की बेशुमार कामयाबी की गंभीर, सख्त, तेज तर्रार व तमाम जमाने की बुराई  अपने…

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अल्लाह का इस्लाम और मुल्लाह का इस्लाम के बीच मे रस्साकशी

एज़ाज़ क़मर “मुल्लाह-वर्ग” ने बहुत चालाकी से खेल खेला और जो हदीस उनके पक्ष मे थी,उसको ‘सच्चा’ (सही) और उसके लेखक को वफादार मुसलमान बताया और जो हदीस उनके पक्ष मे नही थी,उसको ‘ग़लत’ (मौदू) और उसके लेखक को मुनाफिक (गद्दार) मुसलमान बताया। हदीस मे जोड़-तोड़ एवं कुरान की सुविधानुसार व्याख्या से असंभव काम को इन्होने कैसे संभव कर दिखाया, इसको निम्नलिखित उदाहरणो के अध्ययन और विश्लेषण से समझा जा सकता है :- (1) “अमरूहुम शूरा बै-नहुम”  [(“….Amruhum Shura Baynahum…..”) (Quran 42:38)] के अर्थ को “राजनैतिक परामर्श” के बजाय ‘समाजिक…

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उर्दू शायरी में ‘ज़िंदगी’

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप ‘ज़िंदगी’ एक बहुत ही खूबसूरत अहसास है और शायद इंसान की सबसे बड़ी ज़रुरत भी। सारी दुनिया इसी ‘ज़िंदगी’ नाम की एक शय के बदौलत ही चल रही है। सच कहा जाये तो इस ‘दुनिया’ रूपी गाड़ी में ‘ज़िंदगी’ नाम का ही ईंधन का प्रयोग होता है। और इसकी खूबी भी देखिये, हज़ारों शिकायतों के बावजूद भी हर इंसान अपने दोनों हाथों से अपनी ज़िंदगी को कस कर पकड़े हुये है कि वक़्त के बहाव में वह उसके हाथों से कहीं छूट न…

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