“छोड़-कर-आए“

सी. पी. सिंह, एडीटर-ICN ग्रुप  प्रवासी , तब -बने – हम , जब , बहुत -कुछ , छोड़ – कर – आए | अपने – शुभ – गाँव -के -सारे – सुखों -से , मुहँ -मोड़ -कर – आए ||   बूढ़े – बाप – बहन – औ – छोटे – भाई – को | ममता – की – मूरति – रोती – (हुई) माई – जो | सब – आँखें – ज्यों – भरे – सपने – हैं – गाई – सो | माँ – के – भाव –…

Read More

तीन प्रश्न-तीन उत्तर

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप प्रश्नोत्तर – 3 अक्सर उठती है मन के अंदर यह पीड़ा, क्या कभी समय के नियम समझ भी आयेंगे। हर बार करेगा काल अंत मे जय हमको, या हममें भी कुछ कालजयी कहलायेंगे।। (1) क्या चाल‌ समय की निश्चित है, निर्धारित है, जो छूट गया, वह क्यों इतिहास कहाता है। क्या वर्तमान है धरती, पाँवों के नीचे, अक्सर क्यों आने वाला भी दिख जाता है।। (2) जाने भविष्य, फिर यह अतीत, फिर वर्तमान के मध्य कौन सी डोर सदा सेि ‌जीवित है। है…

Read More

“कोरोना-क्लेश“

सी. पी. सिंह, एडीटर-ICN ग्रुप  मेरे – प्राणों – से – भी – प्यारे – हिन्द , सरबस – अर्पण – तुझ – पर |  आ -लदी – महामारी -ये – निन्द , हुई – हानि -से – दुखि -हिय – भर || हम , घर – में – रहेंगे , किसी – से – भी – न – मिलेंगे |   नाक – मुहँ – न – छुएँगे , ना , भीड़ – में – जा , कहीं – मिलें – हिलेंगे | हाँथ – धोते – रहेंगे , अपनों…

Read More

तीन प्रश्न-तीन उत्तर

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप भाग-2 अक्सर कचोटती है मन की यह हूक, हमें, क्या धार समय की सिर्फ़ बहा ले जायेगी। हम पुत्र अपाहिज कथनी के ही सिद्ध हुये, या करनी हमसे भी इतिहास लिखायेगी।। (1) क्या जीवन साँसों का है आना-जाना भर, या नश्वर जीवन अमृत भी बन सकता है। टूटे तारों सा होता है केवल जीवन, अथवा सूरज सा अक्षत भी बन सकता है।।(2) युग युग से हिम में देह जमी है जो अपनी, क्या उसमें भी इक रोज़ हरारत जागेगी। जो रिक्त सदा है…

Read More

तीन प्रश्न-तीन उत्तर

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप भाग-1 अक्सर मन में यह प्रश्न उमड़ कर उठता है, भावी पीढ़ी को हम क्या देने वाले हैं। अवसाद, निराशा के अंधियारे जंगल में, क्या‌ आशा के अब भी अवशेष उजाले हैं? (1) कैसे कह दें बच्चों से सपने झूठे हैं, कैसे कह दें इनके आधार नहीं होते। कैसे बतलायें हम जीवन के सत्य इन्हें, सपने बस सपने हैं, साकार नहीं होते।। (2) परियाँ केवल कल्पना लोक की बातें हैं, दादी-नानी बस झूठ यहाँ सब कहती हैं। गुड्डे-गुड़िया बचपन की केवल नासमझी, बुढ़िया,…

Read More

चिर-प्रतीक्षा

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप   कहानी हवा का एक तेज़ झोंका आया और खिड़की के नीले पर्दों को लहरा गया । कांच का फूलों का गुलदस्ता परदे से टकरा का नीचे गिर पड़ा। कांच बिखर गया फर्श पर । एक सम्मोहन से जैसे जागा मैं – विचारों की भीड़ में पहली बार मुझे यह अहसास हुआ कि मैं अकेला हूँ – बहुत अकेला । दूर तक चले हुए सफ़र में अब तक तो मेरे पांवों के निशान भी शेष नहीं हैं … समय की आंधी ने सब कुछ…

Read More

फिराक़ गोरखपुरी को क्यो नही काबुलीवाला पसंद आई

धीरज मिश्र (हृदय से किशोर लेखक और फिल्मकार) मुंबई: एक ऐसा लेखक जिन्होंने शुरुआत तो फारसी से की लेकिन जब हिंदी के नज़दीक आये तो उसी के हो कर रह गए। फिराक़ गोरखपुरी ने उर्दू के आधुनिक काव्यधारा को एक प्रवाह दी , सन 1896 की 28 अगस्त को गोरखपुर में अहीरों के मोहल्ले में उनका जन्म हुआ। अपने आस पास हमेशा गरीब मजदुर, मोची, और चरवाहों को ही देखा और अंत तक वैसे ही लोग इनके दिल के करीब रहे , फिराक़ की मूर्खता से सदा दुश्मनी थी वो…

Read More

चिर-प्रतीक्षा

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप   कहानी हवा का एक तेज़ झोंका आया और खिड़की के नीले पर्दों को लहरा गया । कांच का फूलों का गुलदस्ता परदे से टकरा का नीचे गिर पड़ा। कांच बिखर गया फर्श पर । एक सम्मोहन से जैसे जागा मैं – विचारों की भीड़ में पहली बार मुझे यह अहसास हुआ कि मैं अकेला हूँ – बहुत अकेला । दूर तक चले हुए सफ़र में अब तक तो मेरे पांवों के निशान भी शेष नहीं हैं … समय की आंधी ने सब कुछ…

Read More

अनाम रिश्ता

अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘चमन’, सेवानिवृत्त अधिकारी एवं लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप  कहानी ‘‘बस….बस….बस। यहीं….गेट पर रोक देना बाबा।’’ बाॅंसुरी की स्वर लहरी सी मीठी, सुरीली आवाज कानों में पड़ी तो राममिलन का रोम-रोम हर्षित हो उठा। ऐसे स्नेह, सम्मान और आत्मीयता भरे सम्बोधन तो बस कभी-कभार ही सुनने को मिलते हैं। वरना तो नित्य सुबह से शाम तक दिन भर का समय अबे, तबे और गाली-गलौज के सम्बोधन सुनते ही बीत जाता है। कानों से उस मधुर आवाज के टकराते ही राम मिलन के हाथ और पाॅंव एक साथ हरकत में…

Read More

उर्दू शायरी में ‘ईद’

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  दरअसल “ईद” सिर्फ़ एक त्यौहार या पर्व ही नहीं है बल्कि ईद “दीपावली”, ” होली” एवं “क्रिसमस” की तरह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति भी है। ईद ज़िंदगी को सर्वश्रेष्ठ ढंग से जीने का सलीका है।भारतवर्ष में ‘ईद’ केवल मुसलमान भाई-बहनों का ही नहीं बल्कि सारे मुल्क का त्यौहार है। ‘ईद’ इस्लाम धर्म का मूल बिंदु है और यह अपने आप में इतने संदेश व पवित्र विचारधारायें समेटे हैं कि दुनिया का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म, मज़हब अथवा पंथ से संबंधित हो,…

Read More