चिर-उरस्थ-माँ

By: C.P. Singh, Editor-ICN Group  आंख के आंसू पोंछि मेरी माँ, होंठो से मुस्काई है । जिमि खिलती शुभ धूप की गरिमा, नभ में बदरी छाई है । पन थककर, माँ के कन्धों से, पावन –पग तक आया है । त्याग और ममता बन्धों से, भरी जननी की काया है । करम- धरम के तट-बन्धों से, प्रेरित लौकिक छाया है । बच्चे- घर- दैनिक धन्धों से, मन उसका भरमाया है । घडी की सुई सी चलती मेरी माँ, रोई ना हरसाई है । आंख के आंसू पोंछि मेरी माँ, होंठो…

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समय का गीत: 10

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने।   है समय अदृश्य लेकिन दृश्य है अनुपम रचाता। सिर्फ़ साक्षी है मगर, इतिहास है इसमें समाता।। यह बिना आवाज़ के ही शून्य में है गीत गाता। यह नचाता है, मिटाता है, हँसाता है, रुलाता।।   है समय अद्भुत, अनोखा, कौन इसको जान पाया। एक में निर्माण, दूजे हाथ में विध्वंस लाया।। युद्ध भी यह, बुद्ध भी यह, नीर भी है, ज्वाल…

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“इंद्रियो पर नियंत्रण करने का अभ्यास” अथवा “इंद्रियो पर विजय पाने का अस्त्र” है “रोज़ा”

एज़ाज़ क़मर, एसोसिएट एडिटर-ICN नई दिल्ली: रोज़ा’ अथवा ‘व्रत’ और ‘उपवास’ का इतिहास पुरानी सभ्यताओ के इतिहास के समान ही पुराना है, क्योकि मानवीय सभ्यता के विकास के बाद स्वास्थ्य और धार्मिक कारणो से व्रत और उपवास की परंपरा शुरू हो गई थी,धार्मिक उत्प्रेरक तत्वो मे प्राचीन परंपराओ और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आम धारणा यह है, कि व्रत, उपवास और रोज़ा एक ही शब्द के पर्यायवाची है,किंतु वास्तव मे ऐसा नही है,क्योकि व्रत और उपवास दोनो अलग-अलग “अम्ल” (कर्म) है और इन दोनो का ‘सामूहिक कर्म’ (अम्ल)…

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ग्रहों की स्थिति एवं व्यक्ति के जीवन पर उनका प्रभाव

डॉ भावेश दवे, ज्योतिषाचार्य, ICN आज हम अपने पाठकों को विभिन्न ग्रहों और उनके प्रभाव के बारे में जानकारी देते हैं। हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में किसी व्यक्ति के जन्म के समय 9 ग्रहों की स्थिति के आधार पर उस व्यक्ति की कुंडली या उसके भाग्य का मूल्यांकन किया जाता है। अजमेर: सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु या बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु व केतु; वहीं वेस्टर्न ऑस्ट्रोलॉजि में 12 ग्रहों की स्थिति के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है, 3 अतिरिक्त ग्रह प्लूटो, नेपच्यून और हर्षल भी सम्मिलित हो जाते हैं। इन…

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भाषा बनाम संस्कृति और संस्कार

डॉ. संजय श्रीवास्तव  मैं आप सभी से सिर्फ एक ही बात पूछना चाहता हूँ कि क्या भाषा किसी संस्कृति के निर्माण करने में सहायक होती है ? मेरा मानना है कि वैसे तो एक संस्कृति के निर्माण में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है किन्तु किसी भी संस्कृति को दर्शाने में सबसे ज्यादा महत्त्व विचारों और भाषा का होता है | हमारे संस्कार हमारे विचारों का एक आइना होते हैं जो ये दर्शाते हैं कि जो भी विचार हमारे मन मस्तिष्क में चल रहे होते हैं वो हमारे क्रिया कलापों…

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समय का गीत: 9

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने।   स्वर लहर मोज़ार्ट की, वह नृत्य माइकल जैक्सन का। तान बिसिमिल्लाह की‌ थी‌ दिव्य, सुर मेंहदी हसन‌ का।। वो रफ़ी, आशा, लता के गीत का जादू निराला। हर ह्रदय में भर दिया जगजीत के स्वर ने उजाला।।    आज डाविंची, पिकासो, तूलिका से झांकते है। और रवि वर्मा, मदन नागर, कला को आँकते हैं।। शिल्प माइकल एंजलो‌ का आज भी‌ खुद…

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गीत–ये लम्हे क्यों उदास हैं ….

घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत –  ये लम्हे क्यों उदास हैं …. पार्श्व गायिका – मधुश्री (मुंबई) संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही https://youtu.be/tmkL1XR0vsE सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका मधुश्री का वास्तविक नाम सुजाता भट्टाचार्य है, लेकिन संगीत जगत उन्हें ‘मधुश्री’ के नाम से जानता है। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने पिता अमरेन्द्रनाथ और माता पार्बती भट्टाचार्य से प्राप्त की। बाद में उन्होंने बिष्णुपुर घराने के संगीताचार्य पंडित अमिय रंजन बंधोपाध्याय से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा हासिल की तथा ठुमरी और ख्याल गायन में…

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ग़ज़ल–घर में रहकर ख़ुद से मिलना अच्छा लगता है ….

*”घर पर रहें – घर पर सुनें”* हर रोज़ नए गाने *ग़ज़ल* –  घर में रहकर ख़ुद से मिलना अच्छा लगता है …. *गायक* – पद्मश्री अनूप जलोटा (मुंबई) *संगीतकार* – केवल कुमार गीतकार* – अशोक हमराही https://youtu.be/MNQhhcLCAR0 पद्मश्री अनूप जलोटा सुप्रसिद्ध गायक होने के साथ – साथ संगीतकार, फ़िल्म निर्माता और अभिनेता भी हैं। भक्ति संगीत में उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें ‘भजन सम्राट’ कहा जाता है। गीत और भजन के अलावा  ग़ज़ल गायकी में भी उन्हें ख़ास मुक़ाम हासिल है। वर्ष 2012 के लिए उन्हें कला-भारतीय शास्त्रीय संगीत-गायन…

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सेल्फी : मनोरंजन या मनोरोग ?

डॉ. संजय श्रीवास्तव  क्या आप सभी जानते है की एक ख़ास सर्वेक्षण के अनुसार अवसाद के बाद दुस्साहसिक सेल्फी लेना युवाओं में होने वाली मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण निकल कर सामने आया है | यूँ तो आप सभी जानते ही हैं की तस्वीरें खिचवाने का या अपनी तस्वीरे बनवाने का प्रचलन सदियों से चला आ रहा है उसके पीछे का मनोविज्ञान यही है की हर व्यक्ति खूबसूरत दिखना चाहता है और वह अपनी खूबसूरत तस्वीर को देख कर गौरान्वित अनुभव करता है ,प्रसन्न होता है वक़्त बदलता गया…

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समय का गीत: 8

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने।   हैं समय के भेद गहरे, शून्य है क्या क्या छिपाये। है जगत कितना अनूठा, किंतु हम कब जान पाये।। था कहा गैगोलियो ने, है धरा फुटबॉल जैसी । सिद्ध न्यूटन ने किया, गति की जगत में रीति कैसी।।   बेंज़ ने दे कार कर दी‌ पूर्ण गति की खूब हसरत। वायु में उड़ने लगा, इंसान राईट की बदौलत।। आइंस्टाइन ने दिया…

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