सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप हटाया जो भी रोड़ा है किसी ने कि यूँ मुझको झिंझोड़ा है किसी ने Removed if there was stumbling block any That way she had shaken me lovingly कहा हमसे निकालो दिल के अरमां ये शोशा खूब छोड़ा है किसी ने Fulfill your desire she permitted me This I suppose she discharged pretexts wonderfully ज़रा टूटी नहीं मेरी मोहब्बत मुझे जी भर के तोडा है किसी ने Never was broken, my love for her Although excessively me she did shatter इरादा क्या था और क्या…
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उर्दू शायरी में ‘ख़ुशबू’ : 2
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप ख़ुशबू न जाने कितने रंगों, कितने अहसासों, जज़बातों, ख़यालों और यादों को बाँधे रहती है। कई बार तो ये ख़ुशबू हमारी जज़बाती जिस्म की आँख तक बन जाती है और एक अदद ख़ुशबू न जाने ख़यालों में हमें क्या-क्या दिखा जाती है। मुजाहिद फ़राज़ मुरादाबाद, भारत से ताल्लुक रखते हैं। वे एक बेहतरीन शायर हैं और उनका एक दीवान ‘बर्फ़ तपती है’ खासा चर्चित है। देखिये, वे ख़ुशबू के हवाले से क्या फ़रमाते हैं – “ख़ुशबू ले कर चाहत की, बस्ती…
Read Moreगीत-गीता : 10
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) (छंद 29-35) श्रीकृष्ण : ( श्लोक 11-53) मारती किसे है कब ये, है नहीं आत्मा मरती। इसका है नाश असंभव, कब मृत्यु इसे है हरती।।(29) आत्मा है सतत् अजन्मी, है मृत्यु क्षेत्र से बाहर। तन मृत्यु सहज पाता है, मन शाश्वत है, तन नश्वर ।।(30) हे पृथापुत्र, ज्ञानी को, यह तत्व सहज उद्घाटित । वह जन्म हीन, अव्यय है, सच उसका है स्थापित ।।(31) जिस भाँति देह वस्त्रों को,…
Read Moreबढ़ती हुई आबादी मानव जाति के लिये भस्मासुर है! तो जनसंख्या दिवस पर सिर्फ चिंतन-मंथन ही क्यो?
एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN नई दिल्ली: पिछले तीन दशको से हर 11 जुलाई को जनसंख्या दिवस के अवसर पर समाचार पत्रो मे बड़े-बड़े विज्ञापन और लेख छपते है,फिर दोपहर से कार्यक्रम शुरू हो जाते है जिसमे बुद्धिजीवी तथा समाज के सम्मानित व्यक्ति जमकर भाषण-बाजी करते है और चाय-नाश्ता या भोजन करने के बाद सब अपने-अपने घर जाकर सो जाते है।इन लोगो का दायित्व था कि घर जाकर अपने परिवृत के मनुष्यो को जनसंख्या नियंत्रण विषय पर शिक्षित तथा प्रशिक्षित करते,लेकिन यह बुद्धिजीवी जनसंख्या नियंत्रण विचार को एक आंदोलन का रूप…
Read Moreउर्दू शायरी में ‘ख़ुशबू’ :1
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप ख़ुशबू न जाने कितने रंगों, कितने अहसासों, जज़बातों, ख़यालों और यादों को बाँधे रहती है। कई बार तो ये ख़ुशबू हमारी जज़बाती जिस्म की आँख तक बन जाती है और एक अदद ख़ुशबू न जाने ख़यालों में हमें क्या-क्या दिखा जाती है। बारिश की कच्ची मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू कभी हमें अपने बचपन के गाँव में पहुँचा देती है तो कभी चमेली और रातरानी की ख़ुशबू अपने पिया की नगरी में। गुलाब की ख़ुशबू नेहरू की शेरवानी में टँके फूल से सुहाग…
Read Moreझारखंड के पहले क्रांतिकारी तिलका माँझी फ़िल्म बनाएंगे धीरज मिश्रा
तिलका माँझी का नाम भारतीय स्वंत्रता संग्राम में बड़े आदर के साथ लिया जाता हैं अब तिलका माँझी पर फ़िल्म बनने जा रही हैं । झारखंड के इस पहले क्रांतिकारी पर फ़िल्म बनाने का काम कर रहे हैं धीरज मिश्रा जो की क्रांतिकारियों पर फ़िल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं इस फ़िल्म के निर्माता घनश्याम पटेल और निमिशा अमीन हैं ,घनश्याम पटेल इससे पहले मनीषा कोइराला को लेकर सिर्फ और पुणे के क्रांतिकारियों पर चापेकर ब्रदर्स बना चुके हैं साथ ही अफजल गुरु के ऊपर ग़ालिब का निर्माण भी…
Read Moreगीत-गीता : 9
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) (छंद 22-28) श्रीकृष्ण : ( श्लोक 11-53) काया पर मोहित होना, कब धीर मनुज का लक्षण । मिथ्या माटी के पीछे, क्यों बरसाता है जलकण।।(22) कौंतेय, चक्र चलता है, निर्माण ध्वंस का पल पल। सुख दुख का, शीत तपन का, रवि उगता, फिर अस्ताचल।। (23) हे श्रेष्ठ पुरुष, सुख दुख में, जो धैर्य नहीं खोता है। निर्लिप्त रहा जो इनसे, वह मोक्ष योग्य होता है।।(24) सत्ता ही नहीं असत्…
Read Moreदक्षिण भारतीय सूफी संत हज़रत ख़्वाजा बंदे नवाज़ के ६१६ वें उर्स मुबारक का गुलबर्गा शरीफ मे आयोजन
एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN नई दिल्ली: सैय्यद वल शरीफ़ कमालुद्दीन बिन मुहम्मद बिन यूसुफ़ अल हुसैनी का उर्स कर्नाटक के गुलबर्गा शरीफ मे 7 दिसंबर 2020 से 9 दिसंबर 2020 के बीच श्रद्धापूर्वक और धूमधाम से मनाया जा कहा है,आप दक्षिण भारत के सबसे बड़े मुस्लिम सूफी संत माने जाते है,बड़ी संख्या मे निसंतान जोड़े आपकी यहां मन्नत मांगनेआते है और लगभग सभी श्रद्धालु निराश नही होते है। भगवान है या नही? यह हमेशा बहस का विषय रहा है,हालांकि भगवान के होने या नही होने से राजनीतिक-कूटनीतिक गतिविधियो पर कोई असर…
Read Moreडिजिटल लर्निंग–वक्त की जरूरत
डॉ. मंजू गुप्ता, शिक्षाविद नई दिल्ली। दुनिया भर में COVID-19 के भयंकर असर को देखते हुए, हर कोई इस महामारी से बचने के सभी एहतियाती उपाय कर रहा है। हम सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं और अपने घरों की सीमाओं में सिकुड़ कर रह गये हैं।आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी बाजार, दफ्तर और स्कूल-कॉलेज बंद हैं।लॉकडाउन की आहट से ही लगने लगे रहा था कि अब पढ़ाई-लिखाई ठप्प हो जाएगी और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ेगा । लेकिन वास्तव में ऐसा हुआ नहीं और इसके…
Read Moreहिंदी विश्वविद्यालय की बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला में पद्मभूषण श्री एम. का व्याख्यान
डॉ. रिन्जु राय, एसोसिएट एडिटर-ICN डायस्पोरा शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्य आवश्यक- श्री एम. वर्धा, 8 जुलाई 2020: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला में आध्यात्मिक चिंतक पद्मभूषण श्री एम ने ‘शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्य और आज का परिप्रेक्ष्य’ विषय पर मंगलवार, 7 जुलाई को दिये व्याख्यान में कहा कि आध्यात्मिक क्षेत्र में भारत का सामना कोई अन्य देश नहीं कर सकता. आध्यात्मिक भारत का इतिहास दो हजार साल से भी अधिक समय का है. आज की शिक्षा को आध्यात्मिक बनाने की दिशा में पहल…
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