चंद्रकांत पाराशर, सीनियर एसोसिएट एडिटर-ICN ग्रुप शिमला: 30 मार्च, 2020 कोविड-19 एक अति संक्रामक रोग है, जिसने पूरी दुनिया को अपनी पकड़ में ले लिया है। इस बीमारी के फैलने से वायरस से ग्रसित व्यक्तियों की संख्या में रोजाना भारी वृद्धि दर्ज हो रही है। भारत में इसके बढ़ते मामलों की संख्या के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों को लेकर गंभीर परिदृश्य बन रहा है। एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री नंद लाल शर्मा ने बताया कि एक जिम्मेदार कारपोरेट निकाय के रूप में और कोविड-19 के खिलाफ…
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जब इंसान से इंसान डरने लगे
लेखक : डॉक्टर मोहम्मद अलीम, संपादक, आइसीएन ग्रुप नई दिल्ली। आज देश व्यापी लोक डाउन का पांचवां दिन है। यह सिलसिला अगले १५ अप्रैल तक जारी रहने वाला है। आज तक के आंकड़े के मताबिक भारत में अबतक तीस लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है और एक हजार से ज़्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। पूरी दुनिया में यह आंकड़ा तीस हजार को पार कर चुका है। बड़े बड़े शक्तिशाली देश इसके आगे पस्त दिखाई दे रहे हैं जैसे अमेरिका, फ्रांस, चाइना, इटली, स्पेन और इंग्लैंड वगैरह।…
Read Moreकोरोना वायरस : मैं समय हूँ
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मेरे बच्चों, जब से सृष्टि बनी हेै, मैं उपस्थित हूँ । मैं तो सृष्टि के निर्माण से भी पहले अपना अस्तित्व प्राप्त कर चुका था क्योंकि महा अंधकारमय शून्य में महाविस्फोट से गाडपार्टकिल की व्युत्पत्ति का भी तो अकेला मैं ही प्रत्यक्षदर्शी हूँ। ये अनंत आकाश गंगायें, ये सहस्रों ब्रह्माण्ड, ये सूरज, ये ग्रह, ये चांद, ये सितारे और यह धरती, मैं सबके निर्माण व विकास का अकेला साक्षी हूँ। मैं कभी नहीं ठहरा। ठहरना मेरी नियत ही नहीं हेै। सदेैव चलते रहना…
Read Moreगुड पेरेंटिंग: आज और भविष्य की ज़रूरत
डॉ. प्रांजल अग्रवाल, एसोसिएट एडिटर-ICN ग्रुप लखनऊ। भौतिकता के इस दौर में, मकान हो या मोटर कार, क्रेडिट कार्ड हो या विदेश यात्रा, सभी भौतिक वस्तुओं तक लगभग सभी की पहुँच होती जा रही है | देखा- देखी के इस दौर में, किसी ज़रूरतमंद की मदद करने से बेहतर, लोग शादी-पार्टी में अथवा गोल्ड लाउन्ज में सिनेमा देखने में अत्यधिक खर्च करना बेहतर समझते हैं | दिखावे का माहोल ऐसा बन पड़ा है की शहर में बड़े मकान से ले कर मोटर कार तक, या फिर मोबाइल फ़ोन से ले कर घड़ी/पर्स…
Read Moreकोरोना वायरस : यह तीसरा विश्वयुद्ध है
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। एक राजा के दरबार में एक जादूगर पहुँचा और अपनी जादुई कलाकारी के प्रदर्शन से सबको मुग्ध करने के बाद जब राजा ने उससे कुछ मांगने के लिये कहा तो उसने कहा,” हे राजन्! मुझे एक शतरंज के प्रत्येक खाने में दोगुने करते हुये चावल प्रदान करें।” राजा ने सोचा कि कुल मुट्ठी भर चावल ही होेंगे किंतु जब चावलों की गणना हुई तो उसके राज्य का कुल चावल भी कम पड़ गया लेकिन जादूगर की झोली…
Read Moreबाबूराव विष्णु पराड़कर जी पत्रकारिता के आदर्श स्तम्भ
संदीप कुमार सिंह • मीडिया विमर्श राजनैतिक मुद्दों पर बहुत ही सगजता से सरल भाषा में लेख लिखने में माहिर पत्रकारों की फेहरिस्त में पराड़कर जी का नाम सबसे उपर आता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी पत्रकारिता को जनजागरण के रुप में इस्तेमाल करने वाले पत्रकार के रुप में भी पराड़कर जी का नाम शुमार हैं। सम्पादकाचार्य पण्डित बाबूराव विष्णु पराड़कर भारत, भारतीय और भारतीयता के उन्नायक थे। राष्ट्र की मुक्ति और समाज की सर्वांगीण उन्नति के लिए इन्होंने 50 वर्षो तक प्रचंड साधना की। राष्ट्रीय जागरण, राष्ट्रभाषा की गौरव…
Read Moreमशाल बनाम कुल्हाड़ी
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप आखिर एक समाज में पत्रकारिता की क्या भूमिका होनी चाहिए? क्या मात्र तथ्य को तथ्य रूप में प्रस्तुत से और सत्य को सत्य कहने से पत्रकारिता की भूमिका का निर्वहन हो जाता है अथवा पत्रकारिता इससे भी आगे की चीज है? ‘समाज कैसे यात्रा करता है?’ प्रश्न रोचक था लेकिन अत्यंत गंभीर भी। जब यह प्रश्न मेरे सामने आया था तो कुछ देर तक तो मैं मात्र प्रश्न को समझने और उसकी तह में जाने की कोशिश करता रहा और कुछ पलों के…
Read Moreराष्ट्र प्रेम और इस्लामी मान्यताएं
डा. मोहम्मद अलीम, संपादक, आईसीएन ग्रुप नई दिल्ली: भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहां हिंदू और मुसलमान एक साथ बहुतायत की संख्या में सारे दुखों और सुखों के साथ सदियों से रहते आए हैं। भिन्नताएं भी रही हैं। खान-पान, संस्कृति एवं रीति रिवाज के मामले में। मगर एक साझी संस्कृति भी इसी के मेल से विकसित हुई जिसे हम हिंदुस्तान की साझी संस्कृति या विरासत के नाम से जानते हैं। जिसमें हमारे खान-पान, भाषा, पहनावा, रीति रिवाज, धार्मिक पद्धतियां अलग होते हुए भी कहीं न कहीं एक जगह…
Read Moreआई.सी.एन.का ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान का यज्ञ प्रारंभ
लखनऊ : रोटी से साहित्य की गंध और साहित्य से रोटी की खुशबू, यही एक सुसंस्कृत, सुगठित व संतुलित समाज की पहली पहचान हेै। आई.सी.एन. मात्र एक वैचारिक क्रांति ही नहीं है बल्कि यह वह सामाजिक प्रयोगशाला है जहाँ सामाज के सर्वांगीण विकास के संदर्भ में अद्भुत परिणामों की अनंत संभावनाएं उपस्थित हैं। सकारात्मक व ज़िम्मेदार पत्रकारिता में वैश्विक स्तर पर अपने आप में एकमात्र अनूठी पहचान रखने वाली आई.सी.एन. यह भी मानती है कि अच्छे से अच्छा विचार भी मात्र शब्दों से रचा सम्मोहन मात्र है जब तक वह…
Read Moreराष्ट्रीय विज्ञान दिवस: नमन करते हैं सर सी वी रमन को।
आकृति विज्ञा, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN UP बहुत वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के बलिदान के लंबे संघर्षों के बाद विज्ञान ने खुद को स्थापित किया। आज समाज में धर्म को भी व्याख्यायित करने के लिये लोग वैज्ञानिक तर्कों की बात करते हैं जिसके लिये वास्तव में वैज्ञानिक समाज बधाई का पात्र है।लेकिन एक बात हमें समझ लेना है कि कुछ भी अर्थात् जो हम बक दें वही विज्ञान नहीं हो जाता ।विज्ञान की स्पेसिफिक मेथडोलाजी है जो आधुनिक विज्ञान के मानदंड तंय करती है।विज्ञान का यह सुखद समय भी है किंतु पीड़ा…
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