आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. गोरखपुर। मेरी वह नायिका जो रायगंज की सड़को के किनारों ,डीह पर और गांव के दखिन गोबर पाथ रही होगी ।चूल्हा चौकटा निबटा के अधिया खेत में बोया बर्सिन काट रही होगी।गेहूं की फसल काटने के उत्सव से पहले अगली फसल की प्लानिंग ने दोपहर की नींद से समझौता करने पर विवश कर दिया होगा ,उस प्यारी नायिका तक मेरा सलाम पहुंचे। मेरा सलाम पहुंचे दुरमूस ठीक कर रहे मेरे उन हीरोज तक जिनके बदौलत घर को मनपसंद शक्ल देने का सपने को…
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कुछ पाया भी क़ुछ खोया भी
डॉ अमेय त्रिपाठी, एसोसिएट एडिटर-ICN कुछ पाया भी क़ुछ खोया भी कुछ भाग्य जगा कुछ सोया भी, क़ुछ स्वप्न जगे क़ुछ टूटे भी, क़ुछ भरम बने क़ुछ छूटे भी . क़ुछ कलित कामनाएं भी रिक्त हुयी क़ुछ चरित विधाएँ भी सिद्ध हुईं दो चार कदम सब और चले दो चार हाँथ फिर और बढे. क़ुछ संभल जड़ से टूट गए क़ुछ लोग स्वार्थवश छूट गए क़ुछ और बढे प्रकृति की ओर सतर्क हो थामा जीवन की डोर क़ुछ मार्ग पुराने अवरुद्ध हुए क़ुछ लोग बेवजह क्रुद्ध हुए क़ुछ गडित हमारी…
Read Moreज़िन्दगी फुटपाथ पर
अमिताभ दीक्षित , एडिटर-ICN U.P. मेरे छू देने से जो सरासरा सी उठती है तमन्ना है कि उसके जानिब कोई अफसाना कहूं कुछ ऐसी बात बहुत नजदीक से छू ले उसे कुछ ऐसे लफ्ज़ जो जा बैठे हैं उसकी पलकों पर पंछियों के शोर से सुबह की सुगबुगाहट आए नींद अभी बाकी हो लैंप पोस्ट बुझ जाए और जिंदगी उनींदी सी करवट बदल के सो जाए……….थोड़ी देर और……….. थोड़ी देर बाद फिर ताके यूं टुकुर टुकुर डूबते तारों की चमक आंखें मिचियाए बुरा सा मुंह बना के उठ बैठे फेंक के चादर कूद चारपाई से तेज कदमों…
Read Moreसमाचारपत्र से प्रेमपत्र तक
तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप हर सवेरे आ जाते हैं समाचारपत्र , खिड़की के रास्ते उछल कर प्रवेश करते हैं ड्राइंगरूम में हत्या , लूट, आगजनी और बलात्कार । कवि कविता रच रहा है लेखक लिख रहा है सत्य और विश्वास की कहानी संगीतकार बरसाता है अक्षत निर्झर और चित्रकार रचता है, इस लिज़लिज़ी ज़मीन पर दमदमाता अंबर लेकिन – यह सब समय के साँचे पर कस नहीं पाता पता नहीं – यह समय गलत है या ये लोग। सोचता हूँ , अभी नहीं आया था मेरे जन्म लेने का…
Read Moreम्यूजियम में चाँद
अमिताभ दीक्षित,एडिटर-ICN उत्तर प्रदेश “कहते हैं पिछली सदी का चांद इस सदी जैसा नहीं था” एक बोला “नहीं बिल्कुल ऐसा ही था” दूसरे ने पहले की बात काटी “तुम्हें कैसे मालूम है” पहले ने पूछा “मैंने म्यूजियम में देखा था” दूसरे ने बताया “वहां चांद कहां से आया” पहले ने पूछा “यह मुझे क्या पता” दूसरा बोला “तुमने किस म्यूजियम में देखा था” पहले ने फिर सवाल किया “सरकारी म्यूजियम में” दूसरे ने अपनी जानकारी जाहिर की “चलो वही चलते हैं चलोगे “ पहले ने चलने की तैयारी करते हुए कहा दोनों चल दिए म्यूजियम पहुंचने पर पता चला कि वह चांद…
Read Moreसमय भाषाओं की मरम्मत का : 2
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप हमें एक दूसरे से जोड़ने का जो सबसे प्रभावशाली माध्यम है, वह संवाद के रूप में हमारी भाषा ही है। तनिक सोचिये तो, यदि दुनिया में कोई भी भाषा न होती तो क्या होता? अब हम यदि उर्दू भाषा की बात करें तो यह सही है कि उर्दू में अरबी, फ़ारसी व हिंदी भाषा के अनेक मौलिक शब्द इस भाषा के शब्दकोष में उपस्थित हैं किंतु अलग-अलग भाषाओं के उन शब्दों को लिखने के लिये उन्हीं भाषा के विशिष्ट वर्ण अर्थात अक्षर का प्रयोग…
Read Moreआंकड़ें जीवन नहीं होते
तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप जैसे सारे कोमल कोमल बच्चे बन गये हैं उस बड़ी मशीन के छोटे छोटे पुर्जे जिसमें पहले से ही भरा है दुनिया का समूचा प्रबंध तंत्र! ओह! यह कैसा छल है, यह कैसा षड्यंत्र!! इस मशीन में भरा जाता है बचपन और किशोरावस्था के स्वप्नों का ताजा लहू, मुलामियत से भरी लचीली देह के, सूख कर लकड़ी बन जाने तक का पूर्व नियोजित श्रम और नित्य की अरुचिकर जूझन एवं उनसे उपजी हताशा और निराशा और बदले में मशीन उगलती है मात्र असीमित प्रोद्योगिकी और…
Read Moreसमय भाषाओं की मरम्मत का : 1
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप हमें एक दूसरे से जोड़ने का जो सबसे प्रभावशाली माध्यम है, वह संवाद के रूप में हमारी भाषा ही है। तनिक सोचिये तो, यदि दुनिया में कोई भी भाषा न होती तो क्या होता? हम सब शायद ‘व्यक्ति’ से ‘वस्तु’ बन कर रह गये होते और अनेक भाव व विचार अपने मन व मस्तिष्क में बुरी तरह ‘उत्पन्न किंतु उत्सर्जित न होने की प्रक्रिया’ में एक के बाद एक विस्फोटित होते हुये फट कर अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे होते। हम भारतवर्ष के…
Read Moreअच्छा मेरी वफ़ा का ये तूने सिला दिया-You Have Rewarded Me Well Of My Love Sincerity
By: Suhail Kakorvi Ghazal; अच्छा मेरी वफ़ा का ये तूने सिला दिया दीवाना था मैं होश सरापा बना दिया You have rewarded me well of my love sincerity Made me sagacious deprived me of my lunacy कैसा शबे विसाल में झंझट मिटा दिया मैं सो चूका था उसने अचानक जगा दिया She has erased , hampered love unity I slept already, but abruptly awakened me she तू ने खिज़ां के ज़ोर को झटका बड़ा दिया एक दम रुख़े बहार से पर्दा उठा दिया You have given a blow to autumn…
Read More*सन्नाटे का सबक*
By: Akhil Kumar Srivastava, Bureau Chief-ICN U.P. दुख का सन्नाटा गहरा है । जीवन दुनिया का ठहरा है।। हरदम गिनती बढ़ती जाती। साँसें पल पल थमती जाती।। पहुंचा मंगल चाँद तलक जो। नतमस्तक है किंतु विश्व वो। जिसने पंख प्रकृति के नोचे। पड़ा ज़मीं पर गुपचुप सोचे।। सृष्टि रही फुफकार भयानक। विवश विश्व हो गया अचानक।। कुछ विचार कर मनुज अभागे। हिंसा सदा जीव पर त्यागे ।। प्रलय यही, इसमें क्या शक है। मिला प्रकृति से बड़ा सबक है।। संकट में है साँस अभी भी। लेकिन जीवित आस अभी भी।। दुख…
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