समय का गीत: 2

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने। 2 हैं हवा में कुछ पुराने पृष्ठ पीले फड़फड़ाते। फट चले कुछ पृष्ठ,रह-रह,थरथराते-कंपकंपाते।। ग्रीस के विस्तार की वे सिर उठाती सभ्यतायें। और बेबीलोन की अद्भुत निराली सर्जनायें।। नील की जलधार पर हँसते विचरते रंग यौवन। और तट पर साँस लेता मुक्त वैभवयुक्त जीवन।। मिस्र की वह सभ्यता, रंगीनियों की वह कहानी। रह गयी इतिहास में ही शेष फ़ारस की निशानी।। सिंधु घाटी…

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समय का गीत: 1

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने। 1 शून्य से उपजा समय या फिर समय से शून्य आया। यह जगत, ब्रह्माण्ड सारा सत्य है या सिर्फ़ माया।। हम सहज ही हैं मनुज या सिर्फ़ हम परछाइयाँ हैं। मात्र मिथ्या स्वप्न हैं हम‌ या अटल सच्चाइयाँ हैं।। हम अधर के चक्र में हैं या अधर हम में कहीं है। हम यहाँ पर है, वहाँ पर हैं, यहीं हैं या वहीं…

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गीताख्यान 1

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. अपनी आँखें अपना चश्मा अपने ऐंगल से देखा है जीवन के इस चक्रव्यूह को गीतों ने हद तक भेदा है। गीतों के मंदिर देखे हैं गीतों की मधुशाला देखी गीत अश्रु से खारे भी हैं मदमाती सुरबाला देखी नरगिस बेला जूही चंपा गीत गंध से ताल मिलाती कोयल भी देखी है हमने इक बिरहन को गीत सुनाती एक व्याहता को पाया है विरह भाव में चैता गाते एक मजूरन को देखा है प्रियतम के संग धान कटाते जातां चक्की के जब दिन थे…

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गर्भवती स्त्री …..

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. गोरखपुर: गर्भवती स्त्री ….. यह शब्द सुनकर गांव सीवान याद आ जाता है। जेठ की दुपहरी हो या पूस की रात ,गांव की महिलाओं को अगर तनिक भी सूचना मिलती थी की कोई गर्भवती स्त्री गांव के डीह को पार कर रही थी तो ‘नून पानी ‘की व्यवस्था भर को वह तत्क्षण सामर्थ्यवती हो जाती थीं। कल का ट्रेनिंग सेशन बाराबंकी की कुछ स्वयंसेवी जनों के साथ बीता ,जिसमें श्रीमती अंचुल (बदला नाम) बता रही थीं कि इन दिनो बेटे (10 बरस)की आनलाइन…

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सुहेल काकोरवी की ग़ज़ल (ज़मीने बद्र पर)

जभी मुमकिन है हम दोनों का रोशन नाम हो जाए मोहब्बत में बराबर से जो वो बदनाम हो जाए only then is possible the glory of our name in love If she equally shares the infamy the censure creates तुम्हारा लुत्फ़ हम कब चाहते हैं आम हो जाए मगर इतना तो हो थोड़ा हमारा काम हो जाए I do not want that become public thy grace But at least I expect some out of that हकीकत यार के जज़्बों के खुल जाना यक़ीनी है कि जिस लम्हा पसन्दीदाह हमें दुश्नाम…

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भला हो शराबियों का

By: Akhil Kumar Srivastava, Bureau Chief-ICN U.P. भला हो शराबियों का, जो सुबह 4:00 बजे से बोतल पानी लेकर 6 – 6 घंटे तक धूप में लाइन लगाकर खड़े रहे, वे भी किसी वीर योद्धा से कम नहीं । अगर यह शराबी ना होते तो इस भयंकर महामारी से जूझ रहे देश की अर्थव्यवस्था की डोलती नैया को कौन संभालता। जी हां, यह वे शराबी ही हैं जो इस कठिन समय में कड़ी धूप में लाइन लगाकर खड़े होकर देश की अर्थव्यवस्था का बीड़ा उठाने के लिए आगे बढ़े, यह बात…

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Sleepy Eyes From Lockdown…. #निद्राएक्सपिरियेंसस्यशार्टपुराणम्वाचयामि

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. घर एकदम साहित्यिक आनंद का श्रवणीय अखाड़ा हो गया है। रेगुलरिटी और अरेगुलरिटी (बोले तो इररेगुलरिटी ) की खतरनाक मिक्सिंग फिरकी ले रही है। एक तो ये खगोलशास्त्र उफ्फ! विदेशों की रात और यहां की सुबह,यहां की सुबह विदेशों की रात। ऊपर से आजकल पनपी मेरी निशा जागरण साधना।कभी दिन में सो लेती हूँ तो रात को अपनी ही वैचारिकी के लिये पहरा देना पड़ता है।जू मैप पर टुकुर टुकुर करती आँखे कभी भी झपक जाती हैं । सुबह मुझे जगाने के लिये…

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तपिश से मेरी वक़्फ़े कश्मकश हर तारे बिस्तर है

By: Suhail Kakorvi ज़मीने ग़ालिब तपिश से मेरी वक़्फ़े कश्मकश हर तारे बिस्तर है मेरा सर रंजे बालीं है मेरा तन बारे बिस्तर है मेरी ग़ज़ल बहोत रंगीन है महका हुआ गुलज़ारे बिस्तर है मेरे पहलू में जो है वो तजल्ली बारे बिस्तर है Very colorful looks that garden like bedding One who is in my embrace is light scattering हमारी करवटें,और आंसुओं से उस को तर करना हमें बर्दाश्त कर लेता है ये इसारे बिस्तर है Make it wet change sides I in love desperation Bedding yet tolerates me,…

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प्रार्थना -2

तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप प्रार्थना शब्द के साथ जो मानसिक चित्र उभरता है, वह बड़ा ही पवित्र, निश्छल व शांत है- कहीं दूर वादियों में चाँदी की घंटियों की जल तरंग- पहाड़ों की चोटियों पर तैरता सुवासित धूम्र और प्रकृति की अधमुँदी आँखों में तैरता संतोष की पराकाष्ठा तक पहुँचा एक जादू । कितना पवित्र – कितना अलौकिक – कितना दिव्य । प्रार्थना व्यक्ति और परमात्मा के बीच संपर्क सेतु है। शायद इसी विचार स्तर पर मुझसे यह शे’र जन्मा है “जिस्म मेरा सफर पे है बाहर, मेरे अंदर…

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प्रार्थना -1

तरुण प्रकाश, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  प्रार्थना शब्द के साथ जो मानसिक चित्र उभरता है, वह बड़ा ही पवित्र, निश्छल व शांत है- कहीं दूर वादियों में चाँदी की घंटियों की जल तरंग- पहाड़ों की चोटियों पर तैरता सुवासित धूम्र और प्रकृति की अधमुँदी आँखों में तैरता संतोष की पराकाष्ठा तक पहुँचा एक जादू । कितना पवित्र – कितना अलौकिक – कितना दिव्य । प्रार्थना व्यक्ति और परमात्मा के बीच संपर्क सेतु है। इस सेतु का प्रयोग कर अपने नश्वर शरीर व स्थूल काया के साथ ही परम सत्ता की ऊर्जा…

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