तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने। क्रूर यवनों ने किये थे आक्रमण भारत धरा पर। जीतने को विश्व था यूनान से निकला सिकंदर ।। वीर पोरस को हरा कर मान निज उसने बढ़ाया। पर मगध में मौर्य वंशी वीर ने उसको हराया।। शाक्य, हूणों ने अनेकों देश पर हमले किये थे। वंशजों ने जाम शासन के यहाँ सदियों पिये थे।। जान कब बख्शी अरब, मंगोल, फिर…
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गीत–अकेले हैं यादों की महफ़िल सजाएँ….
“घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – अकेले हैं यादों की महफ़िल सजाएँ … पार्श्वगायिका – शारदा (मुंबई) संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका शारदा (राजन आयंगर) उन गायिकाओं में से हैं, जिन्होंने हिंदी फ़िल्म जगत में अपना एक अलग मुक़ाम बनाया है। शारदा का परिवार तमिल है, लेकिन उन्हें बचपन से हिन्दी गीत गाने का शौक था। तेहरान में एक पार्टी में फ़िल्मकार राज कपूर ने शारदा को गाते हुए सुना और मुंबई आने का न्योता दिया। मुम्बई आने…
Read Moreजननी-दिवस ( मदर्स-डे )
By: C.P. Singh, Literary Editor-ICN Group मेरा भी बहुत मन करता है कि मै अपनी माँ की फोटो सबको दिखाऊँ | जगह – जगह प्रकाशित करवाऊँ | परन्तु मैं ऐसा नहीं कर पाता क्योंकि मेरी माँ तो मेरा बचपन सुधार कर चली गयी और मेरे पास एक भी फोटो नहीं है मेरी माँ की | मेरे मन में , मेरे ह्रदय में , मेरी सोंच में और मेरी आँखों में मेरी माँ की वह सारी छवियाँ हैं , जो मैंने देखीं , उतनी उमर में | फिर भी उनमें से…
Read Moreडीयर महतारी….
आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. गोरखपुर: असही डांट के सुबेरे जगाती रहो ,दिन बन जाता है मेरा। असल में महतारी शब्द जादुई शब्द है ये प्लेसेंटल रिलेशन बाकमाल है ,बिना कहे बूझने वाली जादूगर कहो या फिर बड़ा से बड़ा झूठ ट्रेस करने वाली डिटेक्टर। हम तो भैया हरदम असही लड़ते भिड़ते मनाते मनवाते रिसियाते कोहाते मोहाते मनुआते देखना चाहते हैं। कब्बो कब्बो हम गजबे कुंभकर्ण अवस्था में जाते हैं और इस अप्रतिम दृश्य को बस महतारिये झेल सकती हैं ,बाकि कौनो तकिया पर भउरा रख देगा। अनकंडीशनल…
Read Moreसमय का गीत: 3
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने। वो भगीरथ की तपस्या, और वो अद्भुत कमंडल। वेग था जिसमें समाया साथ लेकर स्वर्ग का जल।। और फिर शिव शीश पर उतरी महा गंगा निनादी । तर गये पुरखे, धरा पर धार अमृत की बहा दी।। राम ने ले जन्म, लक्ष्मण साथ दानव दैत्य तारे। भूमिजा को वारि, पापी नाश, रावण कुल संहारे।। राम का था राज्य अद्भुत, थे…
Read Moreउर्दू शायरी में ‘बचपन’ और ‘बच्चे’
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप शायद ही दुनिया का ऐसा कोई व्यक्ति हो जिसे बचपन न भाता हो। हर व्यक्ति बड़ी हसरत से अपने बचपन को याद करता है। बचपन ज़िंदगी का वह खूबसूरत हिस्सा है जहाँ हर व्यक्ति खूबसूरत सपने देखता हेै और उसे विश्वास होता हेै कि यह सारी दुनिया उसकी मुट्ठी में है। बचपन जितना हसीन होता हेै, उतना ही ताज़ा भी। बच्चे हर व्यक्ति की कमज़ोरी हैं। सिर्फ़ अपने ही नहीं, बच्चे सभी के प्यारे लगते हैं। यहाँ तक कि सिर्फ़ इंसान के ही…
Read Moreसुनों बसंती हील उतारो,अपने मन की कील उतारो
आकृति विज्ञा ‘अर्पण’, असिस्टेंट ब्यूरो चीफ-ICN U.P. सुनों बसंती हील उतारो अपने मन की कील उतारो नंगे पैर चलो धरती पर बंजर पथ पर झील उतारो जिनको तुम नाटी लगती हो उनकी आँखें रोगग्रस्त हैं उन्हें ज़रूरत है इलाज की ख़ुद अपने से लोग ग्रस्त हैं सच कहती हूँ सुनो साँवली तुमसे ही तो रंग मिले सब जब ऊँचे स्वर में हँसती हो मानो सूखे फूल खिले सब बिखरे बाल बनाती हो जब पिन को आड़ा तिरछा करके आस पास की सब चीज़ों को रख देती हो अच्छा करके मुझे…
Read Moreसमय का गीत: 2
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव, सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप मैं समय के सिंधु तट पर आ खड़ा हूँ, पढ़ रहा हूँ रेत पर, मिटते मिटाते लेख, जो बाँचे समय ने। 2 हैं हवा में कुछ पुराने पृष्ठ पीले फड़फड़ाते। फट चले कुछ पृष्ठ,रह-रह,थरथराते-कंपकंपाते।। ग्रीस के विस्तार की वे सिर उठाती सभ्यतायें। और बेबीलोन की अद्भुत निराली सर्जनायें।। नील की जलधार पर हँसते विचरते रंग यौवन। और तट पर साँस लेता मुक्त वैभवयुक्त जीवन।। मिस्र की वह सभ्यता, रंगीनियों की वह कहानी। रह गयी इतिहास में ही शेष फ़ारस की निशानी।। सिंधु घाटी…
Read Moreमहाराणा प्रताप : एक अजेय योद्धा
सुरेश ठाकुर (महाराणा प्रताप की जयंती पर विशेष) —————————————– बरेली: महाराणा की उपाधि और ‘क्षत्रिय शिरोमणि’ के सम्मान से अलंकृत प्रताप सिंह जिन्हें हम सब महाराणा प्रताप के नाम से जानते हैं, मेवाड़ के शासक उदय सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे |यद्यपि महाराणा प्रताप के जन्म के वर्ष और तिथि को लेकर इतिहासकार एकमत नहीं हैं किंतु उनसे जुड़ी घटनाओं के तार्किक विश्लेषण के उपरांत 9 मई 1549 को महाराणा प्रताप के जन्म की तिथि और वर्ष के रुप में सर्वाधिक समर्थन मिला | राणा सांगा की मृत्यु के उपरांत…
Read Moreकला-संस्कृति व साहित्य के आजीवन उपासक रहे गुरूदेव रबींद्रनाथ टैगोर
राणा अवधूत कुमार, ब्यूरो चीफ-ICN बिहार (रवींद्रनाथ की जयंती पर विशेष) पटना। रवींद्रनाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व हैं, जिन्हें शब्दों में बयां करना बहुत कठिन है। टैगोर के बारे में कुछ लिखने या बताने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। ऐसे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। जिनके संपूर्ण जीवन से एक प्रेरणा या सीख मिलती है। वे एक ऐसे विरल साहित्यकारों में हैं, जो आसानी से नहीं मिलते। कई युगों के बाद धरती पर जन्म लेते हैं। धरती को धन्य कर जाते हैं। वे ऐसी छवि हैं जो जन्म से लेकर…
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