गेहूॅं की कटाई उपरान्त प्रबन्धन, भण्डारण एवं मूल्य संवर्धन

प्रो. आर0 के0 यादव, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, चॅं0 शे0 आ0 कृषि एवं प्रौ0 वि0 वि0 कानपुर & एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  कानपुर। आज से छः दशक पहले जब देश में लोगों को पेट भरने के लिए काफी कठिनाई का सामना करना पड रहा था और खेती बहुत कम क्षेत्रफल पर होती थी, उस समय देश का खाद्यान्न उत्पादन 500 लाख टन था। आज यह बढकर लगभग 2900 लाख टन हो गया है। खाद्यान्न के कुल उत्पादन में 13.37 फीसदी हिस्सेदारी गेंहॅूं के रूप में सबसे बडे उत्पादक देश से है।…

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गीत-गीता : 1

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) प्रथम अध्याय (अर्जुन विषाद योग) (छंद 1-7)   धृतराष्ट्र : (श्लोक 1) व्यग्रता है जानने की जो घटा रणक्षेत्र में है । कल्पना का चित्र केवल दृष्टि वंचित नेत्र में है।। युद्ध की उस धर्म-धरती पर सजी क्या हैं बिसातें। युद्ध को तत्पर, जो न उत्साह से फूले समाते।। (1)   पुत्र मेरे श्रेष्ठ हैं कुरुवंश के उद्दाम योद्धा। शीर्ष अनगिन सम्मिलित निज सैन्यदल में हैं पुरोधा।। देखते जो दिव्य नयनों से, मुझे बतलाओ,संजय! पाण्डु पुत्रों की दशा…

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भारतवंशी प्रवासियों पर शोध कार्य के लिए रिन्जु राय को डॉक्टरेट उपाधि

रिन्जु राय ने ‘भारतीय डायस्पोएरा और हिंदी डायस्पोारिक सिनेमा: सामाजिक-सांस्कृ्तिक अंतरक्रियाओं का विश्लेषणात्मपक अध्ययन’ विषय पर सफलतापूर्वक शोध प्रबंध पूर्ण किया । वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय प्रवासन एवं डायस्पोरा अध्ययन विभाग देश दुनिया के प्रवासी अध्य यन व शोध का एक महत्वरपूर्ण संस्थादन है। इस विभागकी शोधार्थी रिन्जु राय ने भारतीय डायस्पोंरा और हिंदी डायस्पोरिक सिनेमा : सामाजिक-सांस्कृतिक अंतरक्रियाओं का विश्लेुषणात्मक अध्ययन विषय परअत्यन्त  महत्वंपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया है । डायस्पोरिक सिनेमा पर विशिष्ट् अध्ययन के अंतर्गत उन्होंने सामाजिक-सांस्कृततिक पक्षों तथा जीवन दृष्टि के पहलुओं को अपने…

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गीत: कैसे बीतेंगे इंतिज़ार के दिन …

केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN   “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने नमस्कार  Unlock 1 शुरू हो गया है, अब घरों में रहने की बाध्यता भले ही न हो, लेकिन सतर्कता अब और भी ज़रूरी है; यह संक्रमण काल है, ऐसे में अपनी हिफ़ाज़त हमें खुद करनी है। बेहतर होगा जब बहुत ज़रूरी हो तभी घर से निकलें, वो भी बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए… हम आपके लिए रोज़ नए गाने पेश करते रहेंगे, आप *घर में रहें – सुरक्षित रहें गीत – कैसे…

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गीत: आंखों में जब से जाग रहे हैं सपने कल के

केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN   “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – आंखों में जब से जाग रहे हैं सपने कल के गायिका– पुष्पा बनर्जी (वाराणसी) की बोर्ड – शुभंकर चटर्जी गिटार – विश्वजीत चटर्जी संगीतकार- केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही https://youtu.be/AXRyKQc5T-U गायिका पुष्पा बनर्जी आकाशवाणी वाराणसी तथा दूरदर्शन की कलाकार हैं. इन्होने गायन में संगीत प्रभाकर किया है. इनके गुरु ठुमरी सम्राट पंडित महादेव प्रसाद मिश्र थे. पुष्पा बनर्जी देश के विभिन्न राज्यों में अनेक कार्यक्रम दे चुकी हैं.  वह कई भाषाओं में…

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गीत: नैना बहायें नीर तुम बिन कल न परे …

केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN   “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत –  नैना बहायें नीर तुम बिन कल न परे … मिश्र राग : ताल  कहरवा* गायिका – देबारति चक्रवर्ती (कोलकाता) तबला – अर्घ्यजीत चक्रवर्ती (Arghyajit  Chakraborty) संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही https://youtu.be/3hR0zfB2obQ बांग्ला और हिंदी की सुप्रसिद्ध गायिका देबारति चक्रवर्ती को संगीत विरासत में मिला। उनके पिता अजीत कुमार चक्रवर्ती जाने माने तबला वादक रहे हैं। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपने पिता से ही मिली। उन्होंने कथक नृत्य का प्रशिक्षण…

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मन उतना ही गीत तृप्ति के गायेगा

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप तन जितना तृष्णा-तृष्णा चिल्लायेगा ।  मन उतना ही गीत तृप्ति के गायेगा ।। नाखूनों से देह खुरच कर जीवन भर,  काल निरंतर मूक कहानी लिखता है । बाल सुलभ, यौवन मय और बुढ़ापे के, हर स्तर पर चित्र नया ही दिखता है ।।     तन की चादर झीनी होती जाएगी , मन लेकिन हर बार युवा रह जायेगा । तन का क्या आना, क्या जाना, मिथ्या है,  मन का ही यौवन तन पर आ मिलता है ।  मन के रोने से ही  आँखें…

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नकारात्मक बनाम सकारात्मक

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप (इस कविता का आधार मरीज़ों की निगेटिव रिपोर्ट आना है और निगेटिव बस यहीं सफल है) मोहब्बत करने वालों के लिए ये आम है लोगों किसी की इक “नहीं” तो रोज़ उसका काम  लोगों अज़ीयत देना और बर्बाद करना हुस्न की आदत कि इसको क्या किया जाए यही तो उनकी है फितरत सदा इंकार से ही हिज्र का हंगाम होता है इसी से कल्बे आशिक़ का बुरा अंजाम होता है कि है इंकार आतिश जो सुकूने दिल जलाती है ये है तूफ़ान जिसमें हर मसर्रत…

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कैंसर

अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘चमन’, सेवानिवृत्त अधिकारी एवं लिटरेरी एडिटर-ICN हिंदी कहानी और अब आगे जैसे-जैसे समय बीतता गया बंटी और नूरी जी, जान से एक-दूसरे पर न्यौछावर होते चले गए। जितनी भी देर स्कूल में रहते उन दोनों का उठना-बैठना, खाना-पीना, खेलना- कूदना, सब कुछ साथ ही होता था। लेकिन स्कूल से बाहर निकलते ही वे दोनों एक-दूसरे के लिए बिल्कुल अजनवी बन जाते थे। मम्मियों के द्वारा लगायी गयी पाबन्दियों का असर यह हुआ कि वे दोनों बच्चे अब बड़ी सफाई से झूठ बोलना सीख गए। नूरी की मम्मी…

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नस्लवाद और हमारी दोगली मानसिकता

एज़ाज़ क़मर, एसोसिएट एडिटर-ICN नई दिल्ली। “पृथ्वी पर स्वर्ग” जैसी कल्पना को साकार करने का दावा करने वाली अमेरिकी सरकार का मत है,कि वह दुनिया का सबसे बड़ा समतामूलक, स्वतंत्रतामूलक और न्यायमूलक राष्ट्र है,उसका स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी विश्व की सारी मानव जाति के मानवाधिकारो की रक्षा का प्रतीक है। तरक्की और ताकत के नशे मे चूर अमेरिका चीन, पाकिस्तान, ईरान और तीसरी दुनिया के देशो को मानवाधिकार के नाम पर धमकाता रहता है,उन पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाने की बात करता है,अगर दूसरा देश उसकी बात ना माने तो वह…

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