एज़ाज़ क़मर, एसोसिएट एडिटर-ICN नई दिल्ली। सामान्य व्यक्ति के लिए शब्दार्थ और भावार्थ मे कोई अंतर नही होता है, किंतु एक लेखक के लिये जिस लिखित शब्द को पढ़ने मात्र से उस शब्द का अर्थ स्पष्ट जाये तो वह उस अर्थ को शब्दार्थ कहता है और वह पंक्तियो मे छुपे उस शब्द के भाव को व्यक्त करने को भावार्थ कहता है,परन्तु जनसाधारण की भाषा मे अर्थ और व्याख्या के बीच की चीज़ (विषय-वस्तु) को भावार्थ कहते है,जैसे :- सूफी संतो द्वारा प्रेम शब्द का उपयोग भगवान के लिये किया जाता…
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नशीली दवाओं के दुरूपयोग एवम अवैध व्यापार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस
डॉ अनुरूद्ध वर्मा, एडीटर-ICN नशीली दवाओं का कारोबार अपराध, भ्रष्टाचार एवँ आतंकवाद को बढ़ावा देता है जो स्वास्थ्य, सुरक्षा, न्याय शांति एवम स्थायी कल्याण के लिए खतरनाक है। नशीली दवाओं के बढ़ते प्रयोग से पूरी दुनिया चिंतित एवं परेशान है और इससे छुटकारा पाने के लिए प्रयासरत है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 7 दिसंबर 1987 को पारित संकल्प के अनुसार प्रतिवर्ष 26 जून को नशीली दवाओं के दुरूपयोग एवम अवैध व्यापार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष के दिवस की विषय वस्तु बेहतर देखभाल…
Read Moreगीत-गीता : 5
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) प्रथम अध्याय (अर्जुन विषाद योग) (छंद 29-34) अर्जुन : (श्लोक 28-46) मारकर धृतराष्ट्र की संतान हमको क्या मिलेगा। पापियों को मारकर भी पाप हमको ही लगेगा।। है नहीं सामर्थ्य मुझमें, बांधवों को मारने का। फल अधिक मीठा मिलेगा,युद्ध फिर भी हारने का।।(29) मानता हूँ भ्रष्ट हैं सब, लोभ में भटके हुये हैं। स्वार्थ सबके नीतिगत अन्याय में अटके हुये हैं।। जानते हैं किंतु हम कुलनाश है अपराध भारी। पाप से उन्मुक्ति की क्यों रीति न…
Read Moreआइये, लूटे मज़े बरसात के
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप भूल जायें दर्द गुज़री रात के, आइये, लूटे मज़े बरसात के। सब बंधे हैं स्वार्थ की इक डोर से, कुछ यहाँ से कुछ वहाँ उस ओर से। गिद्ध है परिधान में अब हंस के, लग रहे खरगोश आदमखोर से।। अब भला संबंध हैं किस बात के, आइये, लूटे मज़े बरसात के। हम न रंगों के फँसे हैं बंध में, हम न झंडों के किसी प्रतिबंध में। धर्म के ये अर्थ खारिज कर सदा, बस, महकते आत्मा की गंध में।। हम भला किस धर्म…
Read Moreगीत: प्रेम है सागर प्रेम लहर है
केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – प्रेम है सागर प्रेम लहर है गायिका – रेनू पांडे संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही म्युज़िक अरेंजर – अरुण शर्मा https://youtu.be/-Wt8xeYrUOc गायिका रेनू पान्डे विगत 30 वर्षों से आकाशवाणी लखनऊ की लोकसँगीत एवं सुगम सँगीत की कलाकार हैं। उन्होँने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा श्री कृष्ण कुमार कपूर जी से ली एवम् भातखण्डे सँगीत विद्यालय से निपुण किया है। लोकगीत एवं गज़ल गायकी की शिक्षा उन्होने यश भारती पुरस्कार प्राप्त श्री संगीतकार …
Read Moreगीत: तुम बिन मोरे सांवरिया कैसे कटेगी रैन
केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने गीत – तुम बिन मोरे सांवरिया कैसे कटेगी रैन राग किरवानी : ताल कहरवा गायक- प्रो विद्याधर मिश्र संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही https://youtu.be/gckjK726dTg सुप्रसिद्ध गायक प्रोफ़ेसर विद्याधर मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत में पीएचडी की है। प्रयाग संगीत समिति की संगीत प्रवीण परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर वह टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार हैं।वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के…
Read Moreमानसून के मौसम में रखें सेहत का ख्याल: जरूरी है सावधानी
डॉ अनुरूद्ध वर्मा, एडीटर-ICN गर्मी के मौसम के बाद मानसून की प्रतीक्षा रहती है, लगता है कि बरसात के मौसम की फुहारों से कुछ राहत मिलेगी परन्तु बरसात का सुहाना मौसम अपने साथ अनेक बीमारियां भी लाता है। मानसून की शुरुआत हो गई है और बरसात के इस मौसम में कालरा, पेचिस, दस्त, गैस्ट्रोइंट्राइटिस, फूड पाॅयजनिंग, बदहजमी के साथ मलेरिया, वायरल फीवर, डेंगू, चिकुनगुनिया, कन्जेक्टवाइटिस, पीलिया, टाइफाइड बुखार, जापानी इन्सेफेलाइटिस, फोड़े-फुंसी एवं अन्य अनेक रोगों के आक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। बरसात के इस मौसम में कुछ सावधानियाँ अपनाकर…
Read Moreगीत-गीता : 4
तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) प्रथम अध्याय (अर्जुन विषाद योग) (छंद 22-28) अर्जुन : (श्लोक 28-46) हे महागिरिधर, शिथिल सब अंग मेरे हो रहे हैं। भार तृण पर्वत सरीखा व्यर्थ इनका ढो रहे हैं।। रोम हर रोमांच में है, सूखता है मुख निरंतर। तन निरंतर कांपता है, ज्यों हवा में वृक्ष थर-थर।।(22) अब संभलता ही नहीं है, हाथ में गाँडीव मेरे। जल रही है यूँ त्वचा, हो ज्यों सघन ज्वर गात घेरे।। मन भ्रमित सा हो रहा है, है ह्रदय,…
Read Moreग़ज़ल
सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर-ICN ग्रुप कहते है लोग जां का निगह्बां है फासला आज़ार जारिया है तो दरमाँ है फासला All say that protector of life is distance Amidst continuous affliction remedy is distance घुटती हुई दिलों में तमन्नाये वस्ल है क़ुरबत गराँ हुई है तो अरज़ां है फासला Suffocate within the desire of union Costly turned nearness and cheaper became distance सूने पड़े हैं सारे मुक़ामात बंदगी बिलकुल नया ये फ़ितनाये दौरां है फासला All places of worship now are desolate Absolutely strange is this terror of time-the distance…
Read More21 जून: योग दिवस पर सुनिए ये विशेष गीत; ज्ञान योग है ध्यान योग है …
केवल कुमार, एंटरटेनमेंट एडिटर-ICN योग दिवस पर सुनिए ये विशेष गीत https://youtu.be/elxoJWM-En8 “घर पर रहें – घर पर सुनें” हर रोज़ नए गाने योग गीत – ज्ञान योग है ध्यान योग है … गायिका – तुहिना श्रीवास्तव और वेदिका श्रीवास्तव म्यूज़िक अरेंजर – अमिताभ श्रीवास्तव संगीतकार – केवल कुमार गीतकार – अशोक हमराही गायिका तुहिना श्रीवास्तव आकाशवाणी और दूरदर्शन की जानी मानी कलाकार हैं। वह आकाशवाणी से सुगम संगीत और लोक संगीत में अनुमोदित हैं। उन्होंने सुगम और लोक संगीत की शिक्षा यश भारती सम्मानित प्रसिद्ध संगीतकार – गायक केवल…
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