चुनाव आने ही वाले हैं

By : श्रेय शेखर

छपरा : चुनाव आने ही वाले हैं और चुनावी मेंढक अपने वक़्त पर बाहर आ चुके हैं। जनता फिर से सवाल और उम्मीद की गठरी को लेकर अपनी बात रखना चाहती है पर नतीजा हमें पता है। इस सरगर्मी को सबसे नजदीक से बिहार के लोग महसूस कर रहे हैंए वो इसलिए क्यूंकि यहाँ नेता के साथ काफी आपसी सहमति रहती है। वह अपने आस पास रहने वालों का ध्यान बस अभी ही दे पाते हैं। चुनाव की गरिमा का पूरा मज़ाक बना कर अपने देश में अपनी जीत और शौर्य का परचम लहराते हुए फिर ये मंत्री पैड पर विराजमान हो जाएंगे और ऐसा करते इनकी धन राशि बढ़ती जाएगी।

जनता बेहाल होकर अपनी किस्मत को कोसती रहेगी और सरकारी दफ़्तरों आव जाहि में अगले चुनाव का वक़्त आ जायेगा। हालांकि इस से जनता भी कुछ अलग नहीं चाहतीए वह तो अपने ऊपर होने वाले ज़ुल्म और अन्याय को बस एक साल का क़िस्सा बनाकर भूल जाती है और लगता है जैसे कि सिनेमा का पोस्टर बदल दिया गया और वो बात पुरानी हो जाती है। फिर से आख़िर बिजलीए पानी और सड़कों की बदतर हालत को लेकर अपने हाथों को समेटे हुए नेता जी घर आकर ज़रूर अपने नज़रों से हमें सहानुभूति देंगे और यह वादा एक तरक़ीब बनकर काम कर ही जाएगी।

ज़माने के सामने कई नेता भाषण में एक दूसरे पार्टी की बुराई ऐसे करेंगे जैसे वो उनके जानी दुश्मन हों और आज या कल आपस में युद्ध कर बैठेंगे। घबराईये नहीं महामारी इस बार आयी है और इसका भी फ़ायदा वह क़ायदे से उठाएंगे। ज़मीन से आसमान तक अपने प्रचार का पूरा ख़ाका तैयार हो चुका होगा और लोगों को कैसे अपने पास बुलाना है ये गुत्थी तो उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ते हुए ही सीख ली है। पता नहीं वो दिन कब आएगा और कोई आकर कहेगा कि सिंघासन ख़ाली करो कि जनता आती है।

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