डिजिटल लर्निंग–वक्त की जरूरत

डॉ. मंजू गुप्ता, शिक्षाविद नई दिल्ली। दुनिया भर में COVID-19 के भयंकर असर को देखते हुए, हर कोई इस महामारी से बचने के सभी एहतियाती उपाय कर रहा है। हम सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं और अपने घरों की सीमाओं में सिकुड़ कर रह गये हैं।आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी बाजार, दफ्तर और स्कूल-कॉलेज बंद हैं।लॉकडाउन की आहट से ही लगने लगे रहा था कि अब पढ़ाई-लिखाई ठप्प हो जाएगी और बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ेगा । लेकिन वास्तव में ऐसा हुआ नहीं और इसके…

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हिंदी विश्‍वविद्यालय की बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला में पद्मभूषण श्री एम. का व्याख्यान

डॉ. रिन्जु राय, एसोसिएट एडिटर-ICN डायस्पोरा  शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्य आवश्यक- श्री एम. वर्धा, 8 जुलाई 2020: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला में आध्यात्मिक चिंतक पद्मभूषण श्री एम  ने ‘शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्य और आज का परिप्रेक्ष्य’ विषय पर मंगलवार, 7 जुलाई को दिये व्याख्यान में कहा कि आध्यात्मिक क्षेत्र में भारत का सामना कोई अन्य देश नहीं कर सकता. आध्यात्मिक भारत का इतिहास दो हजार साल से भी अधिक समय का है. आज की शिक्षा को आध्यात्मिक बनाने की दिशा में पहल…

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गीत-गीता : 8

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) (छंद 15-21)   संजय : (श्लोक 9-10)   हे राजन्, जिसने निद्रा, पर विजय प्राप्त कर ली थी। उस अर्जुन की आँखों से, आँसू की धार बही थी।।(15)   शोकाकुल अर्जुन‌‍ बोले, मैं रिपु के हाथ मरूंगा। पर देव, समर अपनों से मैं हर्गिज़ नहीं करुंगा।। (16)   फिर हँसे यशोदानंदन, दोनों दल मध्य खड़े वे। अर्जुन को तनिक निहारा, मुस्काये, बोल पड़े वे।। (17)   श्रीकृष्ण : ( श्लोक 11-53)   हे पार्थ,…

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गुड पेरेंटिंग: आज और भविष्य की ज़रूरत

डॉ. प्रांजल अग्रवाल, डिप्टी एडिटर-ICN लखनऊ। भौतिकता के इस दौर में, मकान हो या मोटर कार, क्रेडिट कार्ड हो या विदेश यात्रा, सभी भौतिक वस्तुओं तक लगभग सभी की पहुँच होती जा रही है | देखा- देखी के इस दौर में, किसी ज़रूरतमंद की मदद करने से बेहतर, लोग शादी-पार्टी में अथवा गोल्ड लाउन्ज में सिनेमा देखने में अत्यधिक खर्च करना बेहतर समझते हैं | दिखावे का माहोल ऐसा बन पड़ा है की शहर में बड़े मकान से ले कर मोटर कार तक, या फिर मोबाइल फ़ोन से ले कर घड़ी/पर्स…

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शब्द

अमिताभ दीक्षित, एडिटर-ICN U.P. शब्द साकार है निराकार है शब्द है तमस, शब्द है रजस, शब्द मनस है शब्द नाद है संवाद है शब्द है बिन्दु शब्द है इन्दु शब्द सिन्धु है शब्द प्रभारी है अधिकारी है शब्द वादक है साधक है शब्द अनिल है सलिल है शब्द चेतना है वंचना है शब्द वक्र है चक्र है शब्द है सृजना शब्द है घटना शब्द रचना है शब्द है रेखा शब्द है वृत्त शब्द वलय है शब्द लय है शब्द प्रलय है शब्द भू है शब्द स्वयंभू है शब्द सघन है…

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नक्शे-क़दम पर चलते नेपाल के प्रधानमंत्री अथवा “इवेंट मैनेजर” खड्गप्रसाद शर्मा ‘ओली’।

एज़ाज़ क़मर, डिप्टी एडिटर-ICN नई दिल्ली। हम भारतीय जब भी नेपाल के प्रधानमंत्री ओली’ का नाम सुनते-पढ़ते है, तो हमारे मन मे उनकी छवि एक भारत विरोधी राजनीतिज्ञ अर्थात हमारे देश के दुश्मन की बनती है,किंतु हक़ीक़त उल्टी है क्योकि नेपाल मे उन्हे भारत-परस्त अर्थात भारत के लिये ‘सॉफ्ट-कार्नर’ रखने वाला माना जाता है, वास्तव मे यह भ्रम ओली की बुद्धिमता-दूरदर्शिता और कार्यकुशलता का ही परिणाम है,कि उनके निकट संबंधी और मित्र भी यह नही जानते है कि उनका अगला क़दम क्या होगा? ओली का बचपन बहुत अभाव मे बीता है…

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डर–लॉक डाउन–अनलॉक

सुहैल काकोरवी, लिटरेरी एडिटर, आई.सी.एन. वर्ल्ड उस वक़्त देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भी फ़िक्र के आसार थे जब उन्होंने मार्च २४ २०२० रात आठ बजे सारे मुल्क में लॉक डाउन का ऐलान किया और बहोत बेबसी से कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है जब अपनी तमाम तबाहकारियों के साथ कॅरोना मुल्क में प्रवेश कर चूका था और उसने इटली इंग्लैंड और इंसानी सोच के मुताबिक़ संसार की महान शक्ति समझी जाने वाले अमेरिका को तक़रीबन यक़ीन दिलाना शुरू कर दिया था कि इंसानी अधिकार…

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इस दिशाहीनता का मूल कारण क्या है?

प्रो. प्रदीप कुमार माथुर नई दिल्ली। किसी देश और उसके देशवासियो के चरित्र की सही परीक्षा संकट की घडी में ही होती है। अच्छे समय में तो सब कुछ ही अच्छा लगता है। आज जब विश्व के तमाम अन्य राष्ट्रों के साथ हमारा देश भी गंभीर संकट के समय से गुजर रहा है तो यह प्रश्न स्वाभाविक ही है कि क्या हम इस संकट का सामना चारित्रिक दृढ़ता, धैर्य, ईमानदारी, निस्वार्थ भाव, त्याग और सेवा की भावना से कर रहे है अथवा नही? यह भी जानना आवश्यक है कि क्या…

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मशहूर कोरियोग्रफर सरोज खान का मुंबई में निधन

मुंबई। मशहूर भारतीय कोरियोग्राफर सरोज खान की देर रात निधन हो गया है. बीती रात सरोज खान ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। 71 साल की सरोज खान 17 जून से मुंबई के बांद्रा के एक अस्पताल में भर्ती थी।  उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद यहां भर्ती कराया गया था। जानकारी के मुताबिक देर रात करीब 2 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली,बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात उनका उनका निधन कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ।  सरोज खान अभी तक 200 से ज्यादा फिल्मों के…

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