हिंदी विश्‍वविद्यालय की बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला में डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री जी का उद्बोधन

डॉ. रिन्जु राय, एसोसिएट एडिटर-ICN
भारतीय सांस्‍कृतिक चेतना में कश्‍मीर’ विषय पर दिया व्याख्यान , @vcomgahv के माध्‍यम से फेसबुक लाइव स्‍ट्रीमिंग व यूट्यूब पर हुआ प्रसारण.
जम्‍मू-कश्मीर सांस्‍कृतिक चेतना का गर्भगृह है – डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री
वर्धा, 25 जुलाई 2020: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा में बोधिसत्त्व बाबा साहेब ई-ज्ञान श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान श्रृंखला के सातवें व्याख्यान में गुरुवार, 23 जुलाई को हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री जी ने ‘भारतीय सांस्‍कृतिक चेतना में कश्‍मीर’ विषय पर दिए व्याख्यान में कहा है कि जम्‍मू-कश्‍मीर सांस्‍कृतिक चेतना का गर्भगृह है। इस राज्‍य को सरस्‍वती साधना का केंद्र और शारदा पीठ भी कहा जा सकता है। यहां के लोगों ने 14वीं शताब्‍दी से अपनी सांस्‍कृतिक चेतना को संजोए रखा है। जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर अध्‍येताओं को अपनी गहरी दृष्टि से भीतर की सांस्‍कृतिक चेतना को देखना चाहिए और निरंतर संवाद के साथ उनकी पुन: प्राण प्रतिष्‍ठा करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने की। जम्‍मू-कश्‍मीर मामलों के अध्‍येता डॉ. अग्निहोत्री जी ने अपने सारगर्भित और विद्वत्‍तापूर्ण व्‍याख्‍यान में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का उल्‍लेख करते हुए कहा कि नाग लोगों के संघर्ष का नागपुर महत्‍वपूर्ण केंद्र रहा है। इसी प्रकार के संघर्ष की परंपरा जम्‍मू-कश्‍मीर में भी रही है। महर्षि कश्‍यप ने नाग लोगों को वहां बसने में मदद की थी। नाग लोगों के कारण ही वहां के अनेक शहरों के नामों में नाग शब्द आता हैं। जिस प्रकार सात नदियों का प्रवाह राज्‍य में प्रवाहित होता है वैसे ही सांस्‍कृतिक धाराएं अभी भी वहां प्रवाहित हो रही हैं। श्रोता की ओर से पूछे गये एक प्रश्‍न के उत्‍तर में डॉ. अग्निहोत्री जी ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने धारा 370 तथा जनमत संग्रह का विरोध किया था। उन्‍होंने वहां की समस्‍या का व्‍यावहारिक समाधान सुझाया था, वे इस राज्‍य की समस्‍याओं को गहराई से समझते थे। कार्यक्रम में अध्‍यक्षीय टिप्‍पणी करते हुए विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने आचार्य अग्निहोत्री जी के व्‍याख्‍यान को संमोहित और अभिभूत करने वाला व्‍याख्‍यान बताकर उनके प्रति आभार जताया। परिचय एवं स्वागत वक्तव्य कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अनिल कुमार राय ने दिया। बोधिसत्व बाबासाहेब ई-ज्ञान श्रृंखला के अंतगर्त आयोजित इस व्‍याख्‍यान को विश्वविद्यालय के फेसबुक लाइव व यूट्यूब लाइव पर प्रसारित किया गया। अकादमिक ज्ञान तथा बहुआयामी संवाद-दर्शन की भावनाओं को विकसित करने के लिए यह ऑनलाइन श्रृंखला विश्वविद्यालय की एक अभिनव एवं महत्वाकांक्षी पहल है। जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर संदीप कुमार वर्मा इसके सह संयोजक है। व्याख्यान में बड़ी संख्या में अध्यापक, अध्येता और विद्यार्थी सहभागिता करते हैं.

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