गीत-गीता : 8

तरुण प्रकाश श्रीवास्तव , सीनियर एग्जीक्यूटिव एडीटर-ICN ग्रुप  (श्रीमद्भागवत गीता का काव्यमय भावानुवाद) द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) (छंद 15-21)   संजय : (श्लोक 9-10)   हे राजन्, जिसने निद्रा, पर विजय प्राप्त कर ली थी। उस अर्जुन की आँखों से, आँसू की धार बही थी।।(15)   शोकाकुल अर्जुन‌‍ बोले, मैं रिपु के हाथ मरूंगा। पर देव, समर अपनों से मैं हर्गिज़ नहीं करुंगा।। (16)   फिर हँसे यशोदानंदन, दोनों दल मध्य खड़े वे। अर्जुन को तनिक निहारा, मुस्काये, बोल पड़े वे।। (17)   श्रीकृष्ण : ( श्लोक 11-53)   हे पार्थ,…

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