नई दिल्ली। कर्नाटक के उडुपी में चल रही धर्म संसद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राम मंदिर को लेकर दिए बयान पर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया आई है। जहां बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कन्वेनर और वकील जफरयाब जिलानी ने इसे सुप्रीम कोर्ट को चुनौती करार दिया है वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के औवेसी ने इसे कानून का उल्लंघन करार दिया है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार जिलानी ने कहा है कि संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च अथॉरिटी है और वो यह तय करेगी कि मंदिर कहां बनना है और कहां नहीं। देश कानून के हिसाब से चलता है और हम सब फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
भागवत का बयान संविधान और सुप्रीम कोर्ट को चुनौती है। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि यह माहौल खराब करने की सोची समझी कोशिश हैं। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो फिर ऐसे बयान कैसे दिए जा सकते हैं। बता दें कि आरएसएस प्रमुख ने उडुपी में कहा था कि राम मंदिर वहीं बनेगा। इसे लेकर कोई शक नहीं होना चाहिए, वहां वैसा ही भव्य मंदिर बनेगा जैसे पूर्व में बना था।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। कर्नाटक के उडुपि में आयोजित धर्मसंसद में मोहन भागवत ने कहा कि राम जन्मभूमि पर राम मंदिर ही बनेगा और कुछ नहीं बनेगा। मंदिर उन्हीं पत्थरों से बनेगा। ये मंदिर उन्हीं की अगुवाई में बनेगा जो इसका झंडा उठाकर पिछले 20 से 25 वर्षों से चल रहे हैं। इसके साथ ही मोहन भागवत ने गोरक्षा की वकालत करते हुए कहा कि हमें गायों की सुरक्षा सक्रिय रूप से करनी होगी। अगर गोहत्या पर बैन नहीं लगेगा, तो हम शांति से नहीं जी सकेंगे।
गौरतलब है कि आगामी 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर आखिरी सुनवाई होने जा रही है। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन औवेसी ने आरएसएस प्रमुख के इस बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि उनके इस बयान से साफ जाहिर होता है कि वह खुद को सुप्रीम कोर्ट समझ रहे हैं। यह एक संवेदनशील मुद्दा है, और आरएसएस इस मुद्दे पर आग से खेल रही है।
उल्लेखनीय है कि आपसी बातचीत से अयोध्या मुद्दे के हल को लेकर पिछले दिनों आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने उत्तर प्रदेश जाकर सभी प्रमुख और संबंधित पक्षों से बातचीत की थी। इसके अलावा शिया वक्फ बोर्ड ने भी अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। शिया वक्फ बोर्ड ने जो प्रस्ताव दिया है, उसके मुताबिक अयोध्या में राम मंदिर बनाया जाए और लखनऊ में मस्जिद बने।

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